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a paragraph on "mausam ka badalta swaroop " in hindi

Asked by Shristi Gupta(student), on 19/7/13

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EXPERT ANSWER

आज पूरे संसार में ग्लोबल वार्मिंग का खतरा मंडरा रहा है। पूरे विश्व के वैज्ञानिक इस स्थिति से परेशान है। परन्तु इस स्थिति से निपटना उनके बस की बात नहीं रही है। हम मनुष्य ने अपनी सुविधाओं के नाम पर जो भी कुछ किया है, वह हमारे लिए खतरनाक सिद्ध हो रहा है। वाहनों, हवाई जहाजों, बिजली बनाने वाले संयंत्रों ( प्लांटस), उद्योगों इत्यादि से अंधाधुंध होने वाले गैसीय उत्सर्जन की वजह से कार्बन डायआक्साइड में वृद्धि हो रही है। इन गतिविधियों से कार्बन डायआक्साइड, मिथेन, नाइट्रोजन आक्साइड इत्यादि ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में बढ़ रही हैं, जिससे इन गैसों का आवरण घना होता जा रहा है। यही आवरण सूर्य की परावर्तित किरणों को रोक रहा है, जिससे धरती के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। ग्लेशियरों की बर्फ बढ़ रहे तापमान से तेज़ी से पिघल रही है। जिससे आने वाले समय में जल संकट खड़ा हो सकता है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम पर भी प्रभाव पड़ रहा है। ऋतुएँ छोटी हो रही हैं। उनका समय बदल रहा है। गर्मी में बहुत गर्मी होती है, तो बरसातों में सूखा पड़ जाता है। सर्दियों में ठंड होती ही नहीं और अगर होती है, तो इतनी की तबाही हो जाती है। गर्मियों के मौसम में अचानक बारिश हो जाती है। इस तरह के बदलाव ऋतुओ में देखने को मिल रहे हैं।जंगलों का बड़ी संख्या में हो रहा कटाव भी इसकी दूसरी सबसे बड़ी वजह है। जंगल कार्बन डायआक्साइड की मात्रा को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करते हैं, लेकिन इनकी अंधाधुंध कटाई से यह प्राकृतिक नियंत्रक भी नष्ट हो रहे हैं। यदि जल्दी नहीं की गई तो हमारे जीवन पर भी सवालिया निशान उठ खड़ा होगा।

Posted by Savitri Bisht(MeritNation Expert), on 23/7/13

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