a brief summary of premchand ke phate joote in hindi

प्रस्तुत पाठ में लेखक प्रेमचंद की ऐसी फोटो की बात करता है जिसमें उनकी जूता फटा हुआ है। लेखक को हैरानी होती जिस समाज में लोग अपनी बदहवाली को छुपाने का प्रयास करते हैं, ऐसे में प्रेमचंद ऐसा नहीं करते। उन्हें साहित्य में सम्राट की पदवी मिल चूकी है। परन्तु वह उसके अंहकार में नहीं है। उनके फटे जूते इस ओर भी संकेत करता है कि उपन्यास सम्राट की दशा इतनी खराब दी थी कि उसके पास अपने जूते लेने के लिए भी पैसे नहीं है। लेखक व्यंग्य के माध्यम से गंभीर बात कहता है।

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