alankar kise kahte hain

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नमस्कार मित्र!
 
अंलकार एक प्रकार के नियम होते हैं जिनके अनुसार यदि काव्य को लिखा जाए तो उससे काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है और उसका सौंदर्य बढ़ता है-
उदाहरण के लिए देखिए कैसे-
कनक-कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय,
या खाए बौराए जग, वा पाए बौराए।
इस उदाहरण में कनक-कनक शब्द का दो बार प्रयोग हुआ है और दोनों बार उसका अर्थ भिन्न है। एक कनक का अर्थ सोना है दूसरे का अर्थ धतूरा है। इन को यदि हम इस तरह लिखते-
स्वर्ण-धतूरा ते सौ गुनी मादकता अधिकाय,
या खाए बौराए जग, वा पाए बौराए।
आपने देखा कनक के स्थान पर अन्य शब्द डालने से इन पंक्तियों का सौंदर्य और चमत्कार दोनों चला गया है। अंलकार के प्रयोग से काव्य या कविता का सौंदर्य और चमत्कार के गुणों से भर जाती है।
हर अंलकार अलग होता है और उसके प्रयोग भी भिन्न होता है।
 
ढेरों शुभकामनाएँ!

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