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मित्र!
आपके प्रश्न का उत्तर इस प्रकार है-
1. कवि तथा संसार के बीच किसी प्रकार का संबंध दृष्टिगोचर नहीं होता है।
2. कवि और संसार के मध्य निम्नलिखित विरोधी स्थिति है-
    (क) संसार वैभव जोड़ने में लगा रहता है मगर कवि को इसमें किसी प्रकार का मोह नहीं है।
    (ख) संसार नियमों के अनुरूप आचरण करता है मगर कवि अपने अनुरूप आचरण करता है।
3. इसका आशय है कि कवि की आवाज़ में विनम्रता का गुण विद्यमान है। इसके साथ ही कवि अन्याय का विरोध करता है। इसके लिए वह अपनी आवाज़ को बुलंद रखता है। उसकी आवाज़ में निडर तथा आत्मविश्वास के भाव भी विद्यमान रहते हैं।
4.  उसके पास वह खंडहर विदयमान है, जो उसके प्रेम के अवशेष हैं। इसके आगे बड़े-बड़े राजा भी न्योछावर हैं।

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