any chapter from class 10 hindi sparsh book पाठ्य पुस्तक से संबंधित मुहावरों ( 10-15 ) की सहायता से अपने शब्दों में एक सचित्र कथा लेखन कीजिए | plz help it is very urgentt.... plzz expert.. dont refer it

प्रिय विद्यार्थी,

स्पर्श पाठ्यपुस्तक में कुछ मुहावरे दिए गए हैं, इन्हें अपनी कहानी में प्रयोग कीजिये :

प्राण सूखना – डर लगना

रात में बाग़ से घर लौटते समय भेड़िये को देख कर रामलाल के प्राण सूख गए।

हंसी खेल होना- छोटी मोटी बात होना

तुम तो ऐसे बात कर रहे हो जैसे बिटिया का विवाह कोई हंसीं-खेल हो ।

आंखें फोड़ना - बड़े ध्यान से पढ़ना

भाई, रमेश को तो परीक्षा में प्रथम आना ही था, आखिर साल भर आँखें फोड़ कर पढ़ाई की है।

गाढ़ी कमाई – मेहनत की कमाई

सुरेश की दुकान में चोरी क्या हुई, उसका तो दिल ही टूट गया। आखिर उसकी गाढ़ी कमाई थी, कोई हराम की कमाई नहीं थी।





तलवार खींचना- लड़ाई के लिए उद्धत रहना

वैसे तो अजय-विजय दोनों सगे भाई हैं लेकिन खेतों के बंटवारे को लेकर दोनों में जब देखो तलवारें खिंची रहती हैं।

अंधे के हाथ बटेर लगना- योग्यता ना होने पर भी मूल्यवान वस्तु मिल जाना

वैसे तो शर्मा जी को कार्यालय का कोई काम नहीं आता है लेकिन चौधरी जी के अस्वस्थ होने के कारण विभागाध्यक्ष का चार्ज और मिल गया, इसे कहते हैं अंधे के हाथ बटेर लगना।

चुल्लू भर पानी देने वाला- मुश्किल वक्त में मदद करने वाला

पड़ोसियों से बना कर रखो वीरसिंघ, अभिमान अच्छा नहीं होता, कल कोई दिक्कत आई तो कोई चुल्लू भर पानी देने वाला न होगा।

दांतों पसीना आना – बहुत परेशानी में पड़ना

बेटी की शादी करने में रामपाल जी को दांतों पसीने आ गए।

लोहे के चने चबाना – बहुत मुश्किलों का सामना करना

रानी लक्समी बाई को परास्त करने में अंग्रेजों को लोहे के चने चबाने पड़ गए।

चक्कर खाना- भुलावे में पड़ जाना

ठग ने गहने दुगने करने का लालच देकर ऐसा चक्कर चलाया कि मोहल्ले की कई औरतें अपने जेवरों से हाथ धो बैठी।

आटे दाल का भाव मालूम होना – कठिनाइयों का सामना करना

बाप की कमाई पर बहुत ऐश कर ली तुमने, अब खुद गृहस्थी का बोझ उठाओगे तो आते-दाल का भाव मालूम होगा।

जमीन पर पांव ना रखना- बहुत खुश हो जाना

बेटे की सरकारी नौकरी की खबर सुन कर गुप्ता जी से तो मानो पांव जमीन पर न रखे जा रहे थे।

हाथ पांव फूल जाना- मुश्किल समय में घबरा जाना

फेरों के ठीक पहले दामाद ने कार की मांग कर डाली तो वर्मा जी के तो हाथ पांव फूल गए।


टूट जाना – हिम्मत टूटना, बिखर जाना

भाई, क्या कहूं, तुम तो जानते हो मैं बाधाओं से घबराने वाला व्यक्ति नहीं हूँ लेकिन जब से बेटे – बहु ने अपना घर अलग कर लिया तब से मैं तो अंदर से टूट गया हूँ ।



लता सुरेश के प्रेम में इस तरह पागल थी कि बस अपनी सुध-नूँध ही खो बैठी, न खाने का होश रहा न पहनने का, जब देखो बौराई सी घूमती रहती थी।

बाट जोहना- प्रतीक्षा करना इंतजार करना

जबसे बुआ जी को खबर मिली है कि उनका बेटा फौज से छुट्टी लेकर घर आने वाला है तब से बस उसी की बात जोह रही हैं, आँखें हैं कि दरवाजे से हटती ही नहीं।

खुशी का ठिकाना न रहना – बहुत अधिक प्रसन्नता का होना

अपने बेटे का इंजीनियरिंग में सेलेक्शन होने की खबर सुन कर शर्मा जी की ख़ुशी का ठिकाना ही न रहा, बस जिसे देखो यही समाचार सुनाते फिर रहे हैं।

आग बबूला होना- अत्यधिक क्रोधित हो जाना

माता कैकयी द्वारा षड्यंत्र कर भाई राम को वनवास की बात पता चलते ही भरत क्रोध से आग-बबूला हो उठा, उसने अपनी माता को जी भर कर खरी-खोटी सुनाई।

राह न सूझना- कोई उपाय समझ में ना आना

जीवन भर की कमाई उस धोखेबाज़ की बातों में आकर छह महीने में दोगुनी वाली स्कीम में लगा दी, अब न मेरा पैसा है न वह धोखेबाज़ ही कहीं नजर आता है। मैं क्या करूँ, मुझे तो अब आजीविका निर्वाह की कोई राह नहीं सूझती।


आभार। 

 

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