ashya spasht kijiye-

iss prakar kavi ki marmbhedi drishti ne iss bhashaheen praani ki karun drishti ke bheetar us vishal manav-satya ko dekha hai, jo manushya, manushya ke andar bhi nahi dekh pata. 

इसका अर्थ है जहाँ एक मनुष्य दूसरे मनुष्य के ह्दय के बातों का जान नही पाता। जबकि वे दोनों अपने भावों को बड़ी सरलता से व्यक्त कर सकते हैं। ऐसे संसार में रविन्द्र ने कुत्ते अंदर व्याप्त प्रेम और करूणा के स्वरूप को देख लिया। दोनों ने मौन स्वीकृति से एक दूसरे के प्रेम को स्वीकार किया और आपस में जुड़ गए।

 

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