Athmaprichya kabita Kya kehena chata hai

मित्र ,बच्चन जी के काव्य सृजन का समय हिंदी कविता के छायावादी युग के ठीक बाद का है। छायावादी कविता में जो रोमानीपन है, भाषा में लालित्य के प्रति मोह है और जीवन के यथार्थ के साथ जो निरपेक्षता का भाव है, वह उन दिनों क्षीण हो रहा था। कविता कल्पनाओं के मनोरम संसार से ऊब कर जीवन की वास्तविकता तक पहुंचने के लिये संघर्ष कर रही थी।

  • 0
What are you looking for?