Baalgobin Bhagat ki mrityu unhi ke anuroop hui. Spasht kijiye.

बाल गोबिन भक्त अपने जीवन में कभी आराम से नहीं बैठे। वह हर परिस्थिति में काम करते और ईश्वर भजन करते रहते थे। उनकी मृत्यु भी ऐसे ही हुई। वह परिश्रम करते हुए ही चले गए। वह ऐसी ही मृत्यु चाहते थे। वह किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते थे। वैसा ही हुआ। यह मृत्यु उन्हीं के अनुरूप हुई थी।

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