balgobind bhagat grasay hotay hoya bhi bhagat q khalatay thai?

वह गृहस्थ थे परन्तु वह सदैव भक्ति में लीन रहते थे। उनकी सुबह भक्ति गीतों के साथ आरंभ होती थी और रात भक्ति गीतों से समाप्त होती थी। वह कबीर को मानते थे और उनके आदर्शों पर चलते थे। उनमें वह सब गुण विद्यमान थे, जो उन्हें भक्त कहने के लिए उपयुक्त थे।

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