Can u provide me an essay on topic bhartiya khelo ka vartaman aur bhavishya

मानव जीवन मे खेलकूद का महत्वपूर्ण स्थान है। जीवन तभी पूर्ण होता है, जब उसका सर्वांगीण विकास हो। शिक्षा से बुद्धि तथा आत्मा का विकास होता है, तो खेलों से शारीरिक विकास। आरंभ में भारत में खेलों को इतना महत्व नहीं दिया जाता था। बच्चों को शिक्षा के लिए ही दबाव डाला जाता था। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। भारत में भी नवजागरण के साथ खेलों पर बहुत अधिक ध्यान दिया जाने लगा है। सेना में, पुलिस में, रेलवे में तथा अन्यान्य कार्यालयों में उन प्रत्याशियों को वरीयता दी जाती है। यूनान में कई शताब्दियों पहले ओलम्पिक खेलों का सूत्रपात हुआ था। ये बीच में बंद हो गए थे, परन्तु एक फ्रांसीसी खिलाड़ी के प्रयत्न से दोबारा शुरू हुए। ओलम्पिक में जीतने वाले खिलाड़ियों को इज़्ज़त, धन  प्राप्त होता है। भारत के खिलाड़ियों ने भी इसमें अपनी प्रतिभा के जौहर दिखाए हैं। इसमें अभिनव बिंद्रा (निशानेबाजी), सुशील कुमार (कुश्ती), विजेंदर कुमार (बॉक्सिंग) ने अपना दर्ज कराया है। इसके अतिरिक्त सानिया मिर्जा ने टेनिस में और सानिया नेहवाल ने बैडमिंटन में अपना जोहर दिखाया है। क्रिकेट में तो भारत का नाम सबसे पहले लिया जाता है। हॉकी में भी भारत पीछे नहीं है।
वर्तमान समय में भारत खेलों में आगे हो रहा है। आज के युवा भी खेलों के महत्व को समझ रहे हैं और खेलों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। ऐसा ही रहा तो वह समय दूर नहीं जब भारत का भविष्य खेलों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। हम भारतीय हैं किसी भी चीज़ में हम पीछे रहना नहीं जानते हैं। हमारे पास ऐसे हीरों की खान मौजूद हैं, बस एक दृष्टि डालने की देर है।

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