dekhte dekhte shehnai dedh shatak te saaj se do shatak kasaaj ban saajon ki kataarmein sartaj ho gayi
plz give me the meaning of these lines
(pg 120 3rd para3rd last line)

मित्र बिस्मिल्ला खाँ काशी में रहते थे। वहाँ उनके खानदान की कई पुश्तों ने शहनाई वादन में नाम कमाया था। यह शहनाई डेढ़ शतक से उनके पुरखों को सम्मान दिला रही थी। जब बिस्मिल्ला खाँ ने शहनाई में अपने स्वर फूँके तो उसके मादक स्वर ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इस प्रकार देखते ही देखते शहनाई डेढ़ शतक के साज से दो शतक का साज बन गई। 

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