divyango ki Prati Hamari Kaisi Soch aani chahie part Apurv Anubhav ke Aadhar per spasht kijiye

प्रिय छात्र आपका उत्तर इस प्रकार है।
 
'अपूर्व अनुभव' जापान में रहने वाले दो मित्रों की कहानी है। अपंग व्यक्ति का शारीरिक रुप से सुदृढ़ मित्र से यह स्पष्ट होता है कि मित्रता किसी सीमा में बँधी नहीं होती है। 
दिव्यांग के साथ सामान्य व्यवहार करना चाहिए, जिससे वह हीन भावना से ग्रसित ना हो। दिव्यांग शारीरिक रूप से थोड़ेेे अक्षम अवश्य होते हैं किंतु मानसिक रूप से वे मजबूत होते हैं। हमें समाज में उनको सामान्य व्यक्ति के समान समझना चाहिए। इनका भी समाज में उतना ही अधिकार हैैै जितना एक सामान्य व्यक्ति का। हमें इन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करनी  चाहिए  क्योंकि सम्मानपूर्वक जीने का इन्हें भी अधिकार है।

धन्यवाद।

  • 0
प्रिय मित्र!

आपका उत्तर इस प्रकार हैं:-

विकलांग हमारे समाज के आवश्यक अंग हैं। उन्हें सम्मानपूर्वक जीने का पूरा-पूरा अधिकार है। हमें उन पर सहानुभूति दिखाने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूर्ण कोशिश करना चाहिए। हमें उनके साथ कुछ समय बिताना चाहिए ताकि उन्हें अकेलापन का अहसास न हो। उनके प्रति हमारा विशेष उत्तरदायित्व है। उन्हें सभी प्रकार की सुविधाएँ मिलनी चाहिए।

धन्यवाद।
  • 3
Upvote it..
  • 3
What are you looking for?