"ham panchhi unmukt gagan ke" kavitha ka sandesh

नमस्कार मित्र!
 
कवि इस कविता के माध्यम से आज़ादी का मूल्य बताना चाहता है। उसके अनुसार किसी भी प्राणी के लिए आज़ादी से अधिक प्यारा कुछ भी नहीं है। इसलिए हमें चाहिए कि स्वयं भी आज़ादी से रहते हुए दूसरे को भी आज़ादी से रहने दिया जाए।
 
ढेरों शुभकामनाएँ!

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