"Hum panchi unmukt gagan ke" kavita ki parawise Vayakhya Please?

हम आपको शुरू के कुछ भाग की व्याख्या दे रही हूँ। इस आधार पर स्वयं लिखिए-

१. कवि पंछी के ह्दय की बात को व्यक्त करते हुए कहता है कि हम खुले आकाश में उड़ने वाले हैं। हम पिंजरे में कैद होकर नहीं गा पाएँगे। अर्थात पिंजरे की कैद हमें अच्छी नहीं लगती है। हमें तो खुले आकाश में उड़ना अच्छा लगता है। पंछी कहते हैं की पिंजरे की तीलियाँ चाहे सोने से निर्मित क्यों न हो हमें वहाँ एक पल रहना गवारा नहीं है। हम उनसे टकरा-टकराकर मर जाना पसंद करेंगे। इसके लिए चाहे हमारे पुलकित पंख टूट जाएँ हमें कोई परवाह नहीं है।

 

२. नदियों का बहता जल पीना ही हमें अच्छा लगता है। हम भूखे-प्यासे रह कर मरना पसंद करते हैं। परन्तु कैद का जीवन जीना पसंद नहीं है। वे आगे कहते हैं कि हमें कड़वी निबौरी खाना पसंद है। परन्तु सोने की कटोरी में रखकर दिए गए नाना प्रकार के व्यंजन खाना किसी भी कीमत में पसंद नहीं है।

 

३.हम सोने के पिंजरों में बंधकर उड़ना भूल गए हैं। अर्थात कैद ने हमारी स्वाभविक वृत्तियों को  भूला दिया है। अब तो बस सपनों का ही सहारा है जिसके माध्यम से हम पेड़ की सबसे ऊँची डाल में बैठने का आनंद उठाते हैं। अर्थात् आज़ादी पाने की आशा धूमिल हो रही है।

 

४. वे कहते हैं कि हमारे तो अरमान थे कि में नीले आकाश में तब तक उड़ते रहें, जब तक की उसकी सीमा को खोज नहीं पाते। साथ ही हम सूरज की लाल किरण के जैसे अपनी चोंच में तारों रूपी अनार के लाल-लाल दोनों को चुगने का स्वपन देखते थे। परन्तु गुलामी के कारण यह संभव नहीं है।

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It can be "hum chiriyan khule asmaan ke"

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