i want speech on topic bavisya nirman mein parisram nahi niyathi ki bomikah mahan hain

नमस्कार मित्र,

भविष्य निर्माण में परिश्रम की नहीं नियति की भूमिका महान है।

भविष्य निर्माण में परिश्रम की नहीं नियति की भूमिका महान है। यह बात कई बार स्वयं में एक प्रमाण है। हमारा मानना होता है कि परिश्रम सफलता की कूंजी है, जो बात शायद सत्य हो परन्तु इसे हम पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं कर सकते हैं। परिश्रम का महत्व नकारा नहीं जा सकता परन्तु नियति को भी बिलकुल अनदेखा कर देना सही नहीं है। नियति के बिना मनुष्य कुछ नहीं कर सकता। यदि उसकी नियति राजा बनने की है, तो परिस्थितियाँ स्वयं ही अनुकूल होती जाएँगी। नियति उसके मार्ग से सभी कठिनाइयों को हटाती जाएगी। उदाहरण के लिए एश्वर्या राय और सुष्मिता सेन दोनों ने एक ही वर्ष में भारत की सबसे सुंदर स्त्री की प्रतियोगिता में भाग लिया था। एश्वर्या राय बहुत सुंदर थी और विजेता की प्रबल दावेदार थी।। यह आशा भी जताई जा रही थी कि वही इस प्रतियोगिता की विजेता बनेगी। परन्तु ऐसा नहीं हुआ सुष्मिता सेन विजेता चुनी गई  और एश्वर्या राय उपविजेता बनी। दोनों ने मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स का खिताब भी जीता। दोनों ने ही फिल्मी दुनिया में अपना भाग्य आज़माया। परन्तु आज दोनों के जीवन पर नज़र डाली जाए, तो एश्वर्या आज भारत की सबसे लोकप्रिय और मंहगी अभिनेत्री हैं। उनकी लोकप्रियता भारत में ही नहीं अपितु विदेशों तक फैली हुई है। सुष्मिता सेन भी कम लोकप्रिय नहीं है परंतु एश्वर्या के सम्मुख उनकी लोकप्रियता का आंकड़ा बहुत कम है। यह नियति तो है। सुष्मिता की अधिकतर फिल्में दर्शकों द्वारा नकार दी गई जबकि एश्वर्या की फिल्मों ने सफलता के झंड़े गाड़ दिए। नियति मनुष्य के जीवन में अहम भूमिका रखती है। जिसकी जैसी नियति होती है, वह वैसा ही पाता है। परिश्रम तभी फलता है, जब नियति साथ दे नहीं तो वह भी व्यर्थ हो जाता है। 

एक ही माता-पिता की दो संतानों में से एक जीवन में सफलता के शिखर पर चढ़ती जाती  है और दूसरी संतान योग्यता होने के बाद भी असफलता का मुख देखती है। यह नियति तो है, जो एक को राजा और एक को रंक बना देती है।

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no mam i am againt of luck  

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