lekhak ko Nawab Sahab ka Munh Rahana hi liya kar raha tha aur baten karna bhi Khush Karne Laga kyon

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लेखक यशपाल को नवाब साहब का मौन रहना और बातें करना दोनों ही अखर रहा था। नवाब साहब को देख कर ऐसा लगता था कि उनको एकांत में बैठना था और लेखक के आने से खलल पड़ गया। लेखक से बात करने के लिए, नवाब साहब कोई उत्साह प्रकट नहीं कर रहे थे। अपनी झूठी शान बनाने के लिए नवाब साहब मौन रह रहे थे जो लेखक को पसंद नहीं आ रहा था।  
 

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