Mitrata par dohe plssss.......

मथत मथत माखन रही, दही मही बिलगाव

रहिमन सोई मीत हैं, भीर परे ठहराय

कविवर रहीम कहते हैं कि जब दही को लगातार माथा जाता है तो उसमें से मक्खन अलग हो जाता है और दही मट्ठे में विलीन होकर मक्खन को अपने ऊपर आश्रय देती है, इसी प्रकार सच्चा मित्र वही होता है जो विपत्ति आने पर भी साथ नहीं छोड़ता।

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गिरिये परवत शिखर ते, परिये धरनि मंझार

मूरख मित्र न कीजिए, बूडो काली धार

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि चाहे पर्वत के शिखर से गिरना पड़े, मझधार में फंसे हों या कीचड में धंसना पड़े तब भी मूर्ख से मित्र मत कीजिए।

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जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग ।

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जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग ।

चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग ।।1 ॥

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Mitrata por done
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