pls tell me about roopak,utpreksha,atishyokti alankar in hindi [tommorow is my exam]

1. रूपक अलंकार- जहाँ रुप और गुण को बहुत अधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान को आरोपित कर दिया जाए व उनके बीच का अंतर समाप्त कर दिया जाए, वहाँ रुपक अलंकार होता है अर्थात् जिसकी उपमा दी जाए उसको जो उपमा दी जा रही है वैसा ही मान लिया जाए। 

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।

इस पंक्ति में राम को रत्न रुपी धन माना है।

2. उत्प्रेक्षा अलंकार :- जिसको उपमा दी जा रही है, जिसकी उपमा दी जा रही है उसकी कल्पना कर ली जाती है। इसको पहचानने के लिए इसमें आए शब्द हैं - मनो, मानो, जानो, जनु, मनहु, मनु, जानहु, ज्यों, त्यों आदि इसमें केवल माना जाता है; जैसे

सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात।

मनहुँ नील मणि सैल पर, आतप परयौ प्रभात।।

(इसमें श्री कृष्ण के शरीर को नीलमणि पर्वत और उनके वस्त्र को सुबह की धूप की तरह कल्पना की गई है कि मानो वे ऐसे हैं।)

3. इसमें अन्य + उक्ति कही जाती है, अर्थात जो है उसको किसी अन्य के बारे में कहकर समझाया जाए या व्यंग किया जाए तो, अन्योक्ति अलंकार कहते हैं;

 जैसे - जिन दिन देखे वे कुसुम गई सुबीति बहार

 अब अलि रही गुलाब में अपत कँटीली डार

इसमें भौरे (अलि) के माध्यम से किसी विद्वान व्यक्ति और उसको सहारा देने वाले का वर्णन किया है कि आश्रयदाता अब गुलाब के बिना पतझ़ड़ का पेड़ हो गया है।

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