plz xplain the first vaakh. it is very imp so plz plz give answer fast. i have written the vaakh

rassi kacche daage ki keech rahi hain naav.

jane kab sun meri pukar, kare dev bhavsagar par.

paani tapke kacche sakore, vyarth ho rahe prayas mere.

jee mein uththi huk, ghar jane ki chah hain ghere..

isme kavyitri saans rupi rassi se naav rupi shareer ko kheench rhi h use pta nhi ki kab bhagwan uski pukkar sunkar use is bhavsagar rupi sansaar se par lgakr apne paas bula le......

isme kavyitri khti h ki jis prakaar mitt ke kacche brtan me paani nhi thahar skta usi prakar mere bhagwan ke paas jaane ke prayaas vyarth ho rhe h .

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नमस्कार मित्र!
 
कवियत्री के अनुसार वह भगवान से मिलने को लालयित है। वह साँसों रूपी रस्सी से जीवन रूपी नाव खींच रही है। अर्थात वह जीवन से तंग आ चुकी है और प्रभु के पास जाना चाहती है। परन्तु प्रभु उसकी पुकार नहीं सुन रहे हैं इसलिए वह दुखी हैं। वह कह रही हैं कि जिस तरह कच्ची मिट्टी के बर्तन में पानी अधिक देर तक नहीं रूक पाता है उसी प्रकार मेरे ईश्वर को प्राप्त करने के सभी प्रयास व्यर्थ हो गए हैं। वह कहती हैं इस बात से उन्हें बहुत दुख होता है क्योंकि वह अपने भगवान के पास शीघ्र ही जाना चाहती है।
 
हमारे मित्र ने बहुत अच्छा उत्तर दिया है। उनकी सहायता के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
 
ढेरों शुभकामनाएँ!

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thanxxx 4 da ans...it was helpful

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