Rupak alankaar ke 2 udhaaran.

रुपक अलंकार :- जहाँ रुप और गुण को बहुत अधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का आरोपित कर दिया जाए, वहाँ रुपक अलंकार होता है। अर्थात् जिसकी उपमा दी जाए उसको जो उपमा दी जा रही है वैसा ही मान लिया जाए।

() चरण-कमल बंदौ हरिराई।

(यहाँ चरण को कमल के समान मान लिया है।)

() पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।

(राम को रत्न रुपी धन माना है।)

() मैया मैं तो चन्द्र खिलौना लैहों।

(चन्द्रमा को खिलौना माना है।)

() उदित उदयगिरी मंच पर, रघुवर बाल पतंग

(उदयगिरि को मंच और रघुवर को सूर्य (बाल पतंग) माना है।)

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