Samaj mai vyapt bharastachar ko dur karne ke liye hum vidyarthi ke roop mai kya sahyog de sakte hai.apne vicharo ko patra ke madhyam se apne bhai ko bataye.

मित्र
आपका उत्तर इस प्रकार है।

पता: ................
दिनांक : .............

प्रिय मनोज,
बहुत प्यार!

आशा करता हूँ कि तुम यहाँ सकुशल होंगे। कल पिताजी का पत्र आया था। उनसे मुझे ज्ञात हुआ कि तुम्हारे विद्यालय के मैदान में कुछ निर्माण कार्य करने के बदले कुछ सरकारी अधिकारी रिश्वत मांग रहेे हैं। समाज में फन फैला रहे इस विकराल नाग को हमें मारना होगा। भ्रष्टाचार रूपी इस नाग का विरोध हम विद्यार्थियों से आरंभ करना पड़ेगा। हमारे लिए आवश्यक है कि हम प्रत्येक व्यक्ति के मनोबल को ऊँचा उठाएँ। प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए अपने को इस भ्रष्टाचार से बाहर निकालना होगा। यही नहीं शिक्षा में कुछ ऐसा अनिवार्य अंश जोड़ा जाए, जिससे हमारी नई पीढ़ी प्राचीन संस्कृति तथा नैतिक प्रतिमानों को पहचाने। वे इसे संस्कार स्वरुप लेकर स्वयं के स्वरूप को विकसित करें। हमें न्यायिक व्यवस्था को कठोर बनाना होगा तथा सामान्य जन को आवश्यक सुविधाएँ भी उपलब्ध करानी होगी। इसी आधार पर हमें आगे बढ़ना होगा तभी इस स्थिति में कुछ सुधार की अपेक्षा की जा सकती है। 
 अब मैं पत्र समाप्त करता हूँ। मुझे आशा है कि तुम मेरी बातों पर ध्यान देते हुए उसका पालन करोगे।

तुम्हारा भाई,
गौरव

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