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गिरिजाकुमार माथुर

निम्नलिखित में से किसी एक काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंथ नहीं,
देह सुखी हो पर मन के दुख का अंत नहीं।
दुख है न चाँद खिला शरद-रात आने पर,
क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?
जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण,
छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।

(i) देह सुखी होने पर भी मन के दु:ख का अंत क्यों नहीं होता? (2)

(ii) 'शरद रात' किसका प्रतीक है? (2)

(iii) 'जो न मिला ....... भविष्य वरण' द्वारा कवि मानव को क्या प्रेरणा देता है? (2)

 

अथवा

(ख) यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।
भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।
उज्जवल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।
अरे खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।
मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

(i) 'मधुर चाँदनी रातों की उज्जवल गाथा' से कवि का क्या तात्पर्य है? (2)

(ii) कवि जिस सुख का स्वप्न देख रहा था वह उसे क्यों नहीं मिल पाया? (2)

(iii) अन्य लोगों ने कवि के साथ कैसा व्यवहार किया? (2)


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CBSE Board Paper 2005



निम्नलिखित काव्यांशों में से किसी एक के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) माँ ने कहा पानी में झाँककर
अपने चेहरे पर मत रीझना
आग रोटियाँ सेंकने के लिए है
जलने के लिए नहीं
वस्त्र और आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह
बंधन हैं स्त्री जीवन के
माँ ने कहा लड़की होना
पर लड़की जैसी दिखाई मत देना।

(i) माँ ने बेटी से अपने चेहरे पर रीझने से मना क्यों किया? (2)

(ii) माँ ने बेटी से वस्त्र और आभूषणों के सम्बन्ध में क्या कहा? (2)

(iii) 'लड़की होना पर लड़की जैसी दिखाई मत देना' का आशय स्पष्ट कीजिए। (2)

अथवा

(ख) छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।
जीवन में हैं सुरंग सुधियां सुहावनी
छवियों की चित्र-गंध फैली मनभावनी;
तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,
कुंतल के फूलों की याद बनी चाँदनी।
भूली-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण –

(i) 'छाया मत छूना मन' से कवि का क्या आशय है? (2)

(ii) सुधियों को 'सुहावनी' और 'सुरंग' क्यों कहा गया है? (2)

(iii) हर जीवित क्षण 'भूली-सी एक छुअन' कैसे बन जाता है? (2)


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CBSE Board Paper 2003



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