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देव

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
पाँयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।
साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।
माथे किरीट बड़े दृग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।
जै-जग-मंदिर-दीपक सुंदर, श्रीब्रजदूलह 'देव' सहाई।

(i) यह काव्यांश किस भाषा में रचा गया है?

(ii) 'अनुप्रास' अलंकार का एक उदाहरण चुनकर लिखिए।

(iii) 'जग-मंदिर-दीपक' का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।

(iv) 'मुख-चंद-जुन्हाई' में कौन सा अलंकार है?

(v) काव्यांश किस छंद में लिखा गया है?

अथवा

छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।
जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी
छवियों की चित्र-गंध फैली मनभावनी;
तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,
कुंतल के फूलों की याद बनी चाँदनी।
भूली-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण-
छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।

(i) 'छाया' शब्द किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है?

(ii) अनुप्रास अलंकार का एक उदाहरण चुनकर लिखिए।

(iii) कविता की एक भाषागत विशेषता बताइए।   

(iv) बीती यादों को कवि ने किन शब्दों से चित्रित किया है?

(v) 'क्षण' के लिए प्रयुक्त 'जीवित' विशेषण के सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।   


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CBSE Board Paper 2010



निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : 
पाँयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।
साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।
माथे किरीट बड़े दृग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।
जै-जग-मंदिर-दीपक सुंदर, श्रीब्रजदूलह 'देव' सहाई।

(i) यह काव्यांश किस भाषा में रचा गया है?

(ii) 'अनुप्रास' अलंकार का एक उदाहरण चुनकर लिखिए।

(iii) 'जग-मंदिर-दीपक' का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।

(iv) 'मुख-चंद-जुन्हाई' में कौन सा अलंकार है?

(v) काव्यांश किस छंद में लिखा गया है?

अथवा

छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।
जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी
छवियों की चित्र-गंध फैली मनभावनी;
तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,
कुंतल के फूलों की याद बनी चाँदनी।
भूली-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण-
छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।

(i) 'छाया' शब्द किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है?

(ii) अनुप्रास अलंकार का एक उदाहरण चुनकर लिखिए।

(iii) कविता की एक भाषागत विशेषता बताइए।

(iv) बीती यादों को कवि ने किन शब्दों से चित्रित किया है?

(v) 'क्षण' के लिए प्रयुक्त 'जीवित' विशेषण के सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।


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CBSE Board Paper 2010



निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

फटिक सिलानि सौं सुधार्यो सुधा मन्दिर,

उदधि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद।

बाहर ते भीतर लौं भीति न दिखैए 'देव',

दूध को सो फेन फैल्यो आंगन फरसबंद।

तारा सी तरुनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति,

मोतिन की जोति मिल्यो मल्लिका को मकरंद।

आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,

प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद।।

(i) सुधा मंदिर किस प्रकार की शिलाओं से बना हुआ है? वह किसकी तरह प्रतीत हो रहा है?

(ii) सुधा मंदिर के आंगन और वहाँ खड़ी सुंदरी के बारे में क्या कल्पना की गई है?

(iii) 'आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,

प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद।।"

काव्य-पंक्तियों का आशय समझाइए।

अथवा

कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ

यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है

और यह कि फिर से गाया जा सकता है

गाया जा चुका राग

और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है।

या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है

उसे विफलता नहीं

उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

(i) संगतकार मुख्य गायक की सहायता कैसे करता है?

(ii) संगतकार की आवाज़ में हिचक क्यों होती है? वह अपने स्वर को ऊँचा क्यों नहीं उठाता है?

(iii) संगतकार की मनुष्यता के स्वरुप को अपने शब्दों में समझाइए।


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CBSE Board Paper 2009



निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

(क) डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,

सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।

पवन झूलावै, केकी-कीर बतरावै 'देव',

कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै।।

पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,

कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।

मदन महीप जू को बालक बंसत ताहि,

प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।।

(i) प्रस्तुत पद में बसंत को किसका राजकुमार कहा है और क्यों?

(ii) राई नोन उतारने का क्या आशय है? राजकुमार का राई नोन कौन, कैसे उतारता है?

(iii) बालक बसंत को झूले में झुलाने और बाल-क्रीड़ाए कराने का काम कैसे संपन्न होता है?


अथवा

(ख) कितना प्रामाणिक था उसका दुख

लड़की को दान में देते वक्त

जैसे वही उसकी अंतिम पूँजी हो

लड़की अभी सयानी नहीं थी

अभी इतनी भोली-भाली सरल थी।

कि उसे सुख का आभास तो होता था

लेकिन दुख बाँचना नहीं आता था।

पाठिका थी वह धुँधले प्रकाश की

कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की

(i) माँ का कौन-सा दुख प्रामाणिक था? कैसे?

(ii) बेटी को अंतिम पूँजी क्यों कहा गया है?

(iii) 'पाठिका थी वह धुँधले प्रकाश की' कथन से कवि क्या बताना चाहता है?


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CBSE Board Paper 2009



निम्नलिखित काव्यांशों में से किसी एक को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए – 
(क) पाँयनि नूपुर मंजु बजैं,
कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।
साँवरे अंग लसै पट पीत,
हिये हुलसै बनमाल सुहाई।
माथे किरीट बड़े दृग चंचल,
मंद हँसी मुखचंद्र जुन्हाई।
जै जग-मंदिर-दीपक सुंदर,
श्री ब्रजदूलह 'देव' सहाई।।

(i) श्रीकृष्ण ने कौन-कौन से आभूषण कहाँ-कहाँ पहन रखे हैं? (2)

(ii) श्रीकृष्ण की मंद मुसकान की तुलना किससे की गई है और क्यों? (2)

(iii) 'ब्रजदूलह' कौन हैं? उन्हें 'जग-मंदिर-दीपक' क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए। (2)
 

अथवा
 

(ख) तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
मृतक में भी डाल देगी जान
धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात.....
छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात
परस पाकर तुम्हारा ही प्राण
पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण
छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल

(i) मुसकान के लिए 'दंतुरित' विशेषण का प्रयोग क्यों किया गया है? उस मुसकान को देखकर कवि को क्या लगता है? (2)

(ii) बच्चे का धूल से सना शरीर कवि को कैसा लगता है और क्यों? (2)

(iii) कवि बच्चे के स्पर्श-सुख का विलक्षण प्रभाव किन-किन रुपों में देख रहा है? 2


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CBSE Board Paper 2008



निम्नलिखित काव्यांशों में से किसी एक को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए – 
(क) डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,
सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।।
पवन झुलावै, केकी-कीर बरतावैं 'देव',
कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै।।
पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,
कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।।
मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,
प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।। 

(i) 'मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि' में कौन-सा अलंकार है? (1)

(ii) इन पंक्तियों में किस छंद का प्रयोग किया गया है? (1)

(iii) कवि ने किसे पालना और बिछौना कहा है? (1)

(iv) इन पंक्तियों में किस भाषा का प्रयोग किया गया है? (1)

(v) इन पंक्तियों में बसंत का वर्णन किस रुप में किया गया है? (1)

अथवा

(ख) गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
खो चुका होता है
या अपने ही सरगम को लाँघकर
चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है
जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन
जब वह नौसिखिया था।

(i) जब मुख्य गायक जटिल तानों के जंगल में खो जाता है तो संगतकार क्या करता है? (1)

(ii) इन पंक्तियों में किस छंद का प्रयोग किया गया है? (1)

(iii) इन पंक्तियों का सम्बन्ध हिन्दी साहित्य के किस काल से है? (1)

(iv) इन पंक्तियों में से कोई दो तत्सम शब्द छाँटकर लिखिए। (1)

(v) संगतकार मुख्य गायक को उसके बचपन की याद कैसे दिलाता है? (1)


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CBSE Board Paper 2006



निम्नलिखित काव्यांश के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) नाथ संभुधनु भंजनिहारा
होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।
आयेसु काह कहिअ किन मोही।
सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।
सेवकु सो जो करै सेवकाई।
अरिकरनी करि करिअ लराई।।
सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा।
सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।।
सो बिलगाउ बिहाइ समाजा।
न त मारे जैहहिं सब राजा।।
सुनि मुनिबचन लखन मुसकाने।
बोले परसुधरहि अवमाने।।
बहु धनुही तोरी लरिकाईं।
कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।
येहि धनु पर ममता केहि हेतू।
सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।।
रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभार।
धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार।।

(i) धनुष टूटने के पश्चात परशुराम ने क्या कहा? (2)

(ii) परशुराम के वचन सुनकर लक्ष्मण क्यों मुसकाए? (2)

(iii) लक्ष्मण ने परशुराम से क्या कहा? (2)

अथवा

(ख) फटिक सिलानि सौं सुधार्यौ सुधा मंदिर,
उद्धि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद।
बाहर ते भीतर लौं भीति न दिखैए 'देव',
दूध को सो फेन फैल्यो आँगन फरसबंद।
तारा सी तरूनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति,
मोतिन की जोति मिल्यो मल्लिका को मकरंद।
आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,
प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद।।

(i) चांदनी रात की कान्ति प्रकट करने के लिए कवि ने कौन-से बिम्ब का प्रयोग किया है? (2)

(ii) कवि ने चंद्रमा के लिए किस उपमान का प्रयोग किया है? (2)

(iii) 'तारा सी तरूनि तामें' में कौन-से अलंकार का प्रयोग किया गया है? (2)


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CBSE Board Paper 2006



निम्नलिखित काव्यांशों में से किसी एक को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
(क) फटिक सिलानि सौं सुधारायौ सुधा मंदिर,
उद्धि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद।
बाहर ते भीतर लौं भीति लौं भीति न दिखैए 'देव',
दूध को सो फेन फैल्यो आँगन फरसबंद।
तारा सी तरूनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति,
मोतिन की जोति मिल्यो मल्लिका को मकरंद।
आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,
प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद।।

(i) यह पंक्तियाँ किस छन्द में लिखी गई हैं? (1)

(ii) 'फटिक सिलानि सौं सुधारयौ सुधा मन्दिर' में किस अलंकार का प्रयोग किया गया है? (1)

(iii) 'तारा सी तरूनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति' में किस अलंकार का प्रयोग किया गया है? (1)

(iv) इन पंक्तियों में किस भाषा का प्रयोग किया गया है? (1)

(v) यह पंक्तियाँ हिन्दी साहित्य के किस काल से सम्बन्धित हैं? (1)

अथवा

(ख) दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंथ नहीं,
देह सुखी हो पर मन के दुख का अंत नहीं।
दुख है न चाँद खिला शरद-रात आने पर,
क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?
जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण,
छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।

(i) छाया छूने का अर्थ स्पष्ट कीजिए। (1)

(ii) इन पंक्तियों से कोई दो तत्सम शब्द छाँटकर लिखिए। (1)

(iii) इन पंक्तियों में कौन-से छन्द का प्रयोग किया गया है? (1)

(iv) अन्तिम पंक्ति में कौन-से अलंकार का प्रयोग किया गया है? (1)

(v) इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने क्या सन्देश दिया है? (1)


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CBSE Board Paper 2005



निम्नलिखित में से किसी एक काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए – 

(क) हमारे हरि हारिल की लकरी।
मन क्रम वचन नंद नंदन उर यह दृढ़ करि पकरी।
जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि कान्ह कान्ह जक री।
सुनत जोग लागत है ऐसौ ज्यौं करूई ककरी।
सु तौ व्याधि हमकौं ले आए, देखी सुनी न करी।
यह तौ 'सूर' तिनहिं लै सौपौं जिनके मन चकरी।।

(i) श्री कृष्ण को हारिल की लकरी क्यों कहा गया है? (2)

(ii) गोपियों को योग का नाम सुनते ही कैसा प्रतीत होता है? (2)

(iii) गोपियों के अनुसार किन लोगों के लिए योग साधना उपयुक्त है? (2)

अथवा

(ख) पाँयनि नूपुर मंजु बजैं,
कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।
साँवरे अंग लसै पट पीत,
हिये हुलसै बनमाल सुहाई।
माथे किरीट बड़े दृग चंचल,
मंद हंसी मुखचंद जुन्हाई।
जै जग-मन्दिर-दीपक सुन्दर,
श्रीब्रजदूलह 'देव' सहाई।।

(i) श्रीकृष्ण ने पाँवों में और कमर में कौन-से आभूषण धारण किए हुए हैं? (2)

(ii) कवि ने श्रीकृष्ण की मुसकान की किससे तुलना की है? (2)

(iii) कवि ने श्रीकृष्ण को जग-मन्दिर का दीपक क्यों कहा है? (2)


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CBSE Board Paper 2002



निम्नलिखित काव्यांशों में से किसी एक को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए
(क) डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,
सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।
पवन झुलावै, केकी-कीर बतरावैं 'देव',
कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै।।
पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,
कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।
मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,
प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।।

(i) 'कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै' में कौन-सा अलंकार है? (1)

(ii) यह पंक्तियाँ किस भाषा में लिखी गई हैं? (1)

(iii) इन पंक्तियों में किस ऋतु का वर्णन किया गया है? (1)

(iv) यह पंक्तियाँ हिन्दी साहित्य के किस काल से सम्बन्धित हैं? (1)

(v) इन पंक्तियों में किस छन्द का प्रयोग किया गया है? (1)

अथवा

(ख) माँ ने कहा पानी में झाँककर
अपने चेहरे पर मत रीझना
आग रोटियाँ सेंकने के लिए है
जलने के लिए नहीं
वस्त्र और आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह
बंधन हैं स्त्री जीवन के
माँ ने कहा लड़की होना
पर लड़की जैसी दिखाई मत देना।

(i) इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने क्या संदेश दिया है? (1)

(ii) इन पंक्तियों में स्त्री-जीवन का बन्धन किसे माना गया है? (1)

(iii) यह पंक्तियाँ हिन्दी साहित्य के किस युग से सम्बन्धित हैं? (1)

(iv) यह पंक्तियाँ किस छन्द में लिखी गई हैं? (1)

(v) माँ ने आग के विषय में लड़की से क्या कहा? (1)


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CBSE Board Paper 2002



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