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मैं सबसे छोटी होऊँ

मैं सबसे छोटी होऊँ


काव्यांश 1
मैं सबसे छोटी होऊँ,
तेरी गोदी में सोऊँ,
तेरा अंचल पकड़-पकड़कर
फिरूँ सदा माँ! तेरे साथ,
कभी न छोड़ूँ तेरा हाथ!
बड़ा बनाकर पहले हमको
तू पीछे छलती है मात!
हाथ पकड़ फिर सदा हमारे
साथ नहीं फिरती दिन-रात!

प्रसंग 1
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तिका वसंत भाग-1 की कविता 'मैं सबसे छोटी होऊँ' से ली गई हैं। इसके रचनाकार 'सुमित्रानंदन पंत' जी हैं। इन पंक्तियों में एक बच्ची सदैव अपने माँ के साथ की अभिलाषा रखती है।

व्याख्या 1
बच्ची माँ को संबोधित करते हुए कहती है, ''माँ मैं यही अभिलाषा रखती हूँ कि मैं घर में सबसे छोटी होऊँ और तेरी गोद में हमेशा मैं ही सोऊँ। माँ! …

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