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डायरी लेखन

डायरी लेखन

डायरी सामान्य जीवन में घटने वाली घटनाओं का एक लेखा-जोखा है। यह ऐसे पन्नों का रूप है, जिसमें महीने, दिन आदि छपे होते हैं। डायरी को हिन्दी में दैनिकी, दैनंदिनी भी कहते हैं। प्राय: लोग इसका प्रयोग आवश्यक कार्यों को स्मरण रखने के लिए करते हैं। परन्तु आज इसका उपयोग इससे भी अधिक होने लगा है। यह लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने लगी है। लोग इसका उपयोग अपने जीवन में घटित महत्वपूर्ण घटनाओं को सहेजकर रखने के लिए करते हैं। अपनी इसी उपयोगिता के कारण यह हिंदी साहित्य का हिस्सा भी बन गई है। आज यह गद्य की एक नयी विधा के रूप में विकसित हुई है। डायरी का एक ही काम नहीं है। यह एक अच्छी मित्र भी है। यह एक अच्छे मित्र के समान सुख-दुख को बाँटने का काम भी करती है। तनाव के क्षणों में मन को राहत देती है। इसके साथ ही इसके अंदर ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ भी प्राप्त हो जाते हैं, जो हमें अपने इतिहास से जोड़ते हैं।
 

डायरी लेखन

कुछ लोग डायरी में घटनाओं, अनुभवों और स्मृतियों के दिन, महीने तथा वर्ष के हिसाब से सहेज कर रखते हैं। सहेजकर रखने का यही कौशल डायरी लेखन कहलाता है। इसमें मन के उद्गार शब्द बनकर निकल पड़ते हैं तथा वही स्मृतियाँ डायरी के पन्नों में सदैव के लिए अमर हो जाती हैं। इसमें हम अपने विचारों तथा अनुभवों को स्वयं के लिए लिपिबद्ध करते हैं। आगे चलकर यही डायरी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बनकर अमर हो जाती है। इसकी उपयोगिता को देखते हुए साहित्य में इसे स्थान प्राप्त हुआ है और डायरी लेखन के रूप में इसे सर्वसम्मति द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।

डायरी लेखन का अतीत

डायरी लेखन की प्रक्रिया प्राचीनकाल से चली आ रही है परंतु इसको प्रसिद्धि ऐनी फैंक के कारण ही प्राप्त हुई है। इनके कारण ही डायरी लेखन साहित्य में विधा के रूप में …

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