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Board Paper of Class 10 2005 Hindi Delhi(SET 3) - Solutions

(i) इस प्रश्न-पत्र के चार खण्ड हैं क, ख, ग और घ।
(ii) चारों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
(iii) यथासंभव प्रत्येक खण्ड के उत्तर क्रमश: दीजिए।
  • Question 1

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए – 


    हम अपने कार्यों को देश के अनुकूल होने की कसौटी पर कसकर चलने की आदत डालें, यह बहुत उचित है, बहुत सुंदर है, पर हम इसमें तब तक सफल नहीं हो सकते, जब तक कि हम अपने देश की भीतरी दशा को ठीक-ठीक न समझ लें और उसे हमेशा अपने सामने न रखें।

    हमारे देश को दो बातों की सबसे पहले और सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। एक शक्ति-बोध और दूसरा सौंदर्य-बोध! बस, हम यह समझ लें कि हमारा कोई भी काम ऐसा न हो जो देश में कमज़ोरी की भावना को बल दे या कुरूचि की भावना को।

    "ज़रा अपनी बात को और स्पष्ट कर दीजिए।" यह आपकी राय है और मैं इससे बहुत ही खुश हूँ कि आप मुझसे यह स्पष्टता माँग रहे हैं।

    क्या आप चलती रेलों में, मुसाफ़िरखानों में, क्लबों में, चौपालों पर और मोटर-बसों में कभी ऐसी चर्चा करते हैं कि हमारे देश में यह नहीं हो रहा है, वह नहीं हो रहा है और यह गड़बड़ है, वह परेशानी है? साथ ही क्या इन स्थानों में या इसी तरह के दूसरे स्थानों में आप कभी अपने देश के साथ दूसरे देशों की तुलना करते हैं और इस तुलना में अपने देश की हीन और दूसरे देशों को श्रेष्ठ सिद्ध करते हैं?

    यदि इन प्रश्नों का उत्तर 'हाँ' है, तो आप देश के शक्ति-बोध को भयंकर चोट पहुँचा रहे हैं और आपके हाथों देश के सामूहिक मानसिक बल का ह्रास हो रहा है। सुनी है आपने शल्य की बात! वह महाबली कर्ण का सारथी था। जब भी कर्ण अपने पक्ष की विजय की घोषणा करता, हुंकार भरता, वह अर्जुन की अजेयता का एक हलका-सा उल्लेख कर देता। बार-बार इस उल्लेख ने कर्ण के सघन आत्मविश्वास में संदेह की तरेड़ डाल दी, जो उसकी भावी पराजय की नींव रखने में सफल हो गई।

    अच्छा, आप इस तरह की चर्चा कभी नहीं करते, तो मैं आपसे दूसरा प्रश्न पूछता हूँ। क्या आप कभी केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं! अपने घर का कूड़ा बाहर फेंकते हैं? मुँह से गंदे शब्दों में गंदे भाव प्रकट करते हैं? इधर की उधर, उधर की इधर लगाते हैं? अपना घर, दफ़्तर, गली गंदा रखते हैं? होटलों, धर्मशालाओं में या दूसरे ऐसे ही स्थानों में, ज़ीनों में, कोनों में पीक थूकते हैं? उत्सवों, मेलों, रेलों और खेलों में ठेलमठेल करते हैं, निमंत्रित होने पर समय से लेट पहुँचते हैं या वचन देकर भी घर आने वालों को समय पर नहीं मिलते और इसी तरह किसी भी रूप में क्या सुरूचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?

    यदि आपका उत्तर हाँ है, तो आपके द्वारा देश के सौंदर्य-बोध को भयंकर आघात लग रहा है और आपके द्वारा देश की संस्कृति को गहरी चोट पहुँच रही है।

    "क्या कोई ऐसी कसौटी भी बनाई जा सकती है, जिससे देश के नागरिकों को आधार बनाकर देश की उच्चता और हीनता को हम तौल सकें?"

    लीजिए चलते-चलते आपके इस प्रश्न का भी उत्तर दे ही दूँ। इस उच्चता और हीनता की कसौटी है, चुनाव!

    जिस देश के नागरिक यह समझते हैं कि चुनाव में किसे अपना मत देना चाहिए और किसे नहीं, वह देश उच्च है और जहाँ के नागरिक गलत लोगों के उत्तेजक नारों या व्यक्तियों के गलत प्रभाव में आकर मत देते हैं, वह हीन है।

    इसलिए मैं कह रहा हूँ कि मेरा, यानी हरेक नागरिक का यह कर्त्तव्य है कि जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें, और मेरा अधिकार है कि मेरा मत लिए बिना कोई भी आदमी, वह संसार का सर्वश्रेष्ठ महापुरूष ही क्यों न हो, किसी अधिकार की कुरसी पर न बैठ सके।

    (i) अपने कार्यों को देश की कसौटी पर कसकर करने का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए। (2)

    (ii) व्यक्ति अपने देश के शक्तिबोध को किस प्रकार चोट पहुँचाता है? (2)

    (iii) कर्ण की पराजय में शल्य ने किस प्रकार सहयोग दिया? (2)

    (iv) हम अपने देश के सौंदर्य-बोध को किस प्रकार आघात पहुँचाते हैं? (2)

    (v) उपरोक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। (2)

    (vi) 'अजेयता' तथा 'उत्तेजक' शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए। (2)


     

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  • Question 2

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
    मैं अकेला
    देखता हूँ आ रही
    मेरे दिवस की सांध्य बेला
    पके आधे बाल मेरे
    हुए निष्प्रभ गाल मेरे
    चाल मेरी
    मन्द हो जा रही है
    हट रहा मेला।
    जानता हूँ नदी झरने
    जो मुझे थे पार करने
    कर चुका हूँ,
    हँस रहा यह देख
    कोई नहीं मेला।

    (i) कवि निराशा का अनुभव क्यों करता है? (1)

    (ii) कवि के शरीर की स्थिति में क्या परिवर्तन हुआ है? (1)

    (iii) 'हट रहा मेला' का आशय स्पष्ट कीजिए। (1)

    (iv) कवि कौन-से नदी-झरने पार कर चुका है? (1)

    (v) निराशा की स्थिति में भी कवि को हँसी क्यों आती है? (2)

    (vi) कवि स्वयं को अकेला क्यों अनुभव करता है? (2)

    अथवा

    मुझे लड़नी है एक छोटी-सी लड़ाई
    एक झूठी लड़ाई में मैं इतना थक गया हूँ
    कि कसी बड़ी लड़ाई के काबिल नहीं रहा।
    मुझे लड़ना नहीं अब
    किसी छोटे कद वाले आदमी के इशारे पर
    जो अपना कद लंबा करने के लिए
    पूरे देश को युद्ध में झोंक देता है।
    मुझे लड़ना नहीं,
    किसी प्रतीक के लिए
    किसी नाम के लए
    किसी बड़े प्रोग्राम के लिए
    मुझे लड़नी है एक छोटी-सी लड़ाई
    छोटे लोगों के लिए
    छोटी बातों के लिए।
    मुझे लड़ना है एक मामूली क्लर्क के लिए
    जो बिना चार्जशीट के मुअत्तिल हो जाता है
    जो पेट में अल्सर का दर्द लिए
    जेबों में न्याय की अर्ज़ी की प्रतिलिपियाँ भरकर
    नौकरशाही के फ़ौलादी दरवाज़े
    अपनी कमज़ोर मुट्ठियों से खटखटाता है।
    मुझे लड़ना है,
    जनतन्त्र में उग रहे वन तन्त्र के ख़िलाफ
    जिसमें एक गैंडानुमा आदमी दनदनाता है।
    मुझे लड़ना है।
    अपनी ही कविताओं के बिंबों के ख़िलाफ़
    जिनके अँधेरे में मुझसे-
    ज़िंदगी का उजाला छुट जाता है।

    (i) किस लड़ाई को कवि झूठी लड़ाई मानता है? (1)

    (ii) छोटे कद वाले और लम्बे कद वाले आदमी से कवि का क्या आशय है? (1)

    (iii) कवि समाज के किस वर्ग के हित में संघर्ष करना चाहता है और क्यों? (2)

    (iv) प्रस्तुत कविता में सामान्य व्यक्ति की शोषण-व्यथा का वर्णन किस प्रकार किया गया है? (1)

    (v) अपनी दृष्टि में कवि जिसे छोटी लड़ाई कहता है, क्या वह सचमुच छोटी लड़ाई है? यदि नहीं तो क्यों? (2)

    (vi) कवि किसके विरूद्ध और क्यों लड़ना चाहता है? (1)

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  • Question 3

    निम्नलिखित में से एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिए –

    (क) वर्तमान युग में भ्रष्टाचार निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति धन की लालसा से ग्रस्त है। इसके फलस्वरुप भ्रष्टाचार में वृद्धि हो रही है। व्यापारी वस्तुओं में मिलावट करते हैं। पारिवारिक सम्बन्धों में अनैतिकता में वृद्धि हो रही है। वेश्याओं की बढ़ती संख्या समाज को खोखला कर रही है।

    (ख) आधुनिक युग में खेल मनोरंजन का एक प्रमुख साधन है। खेल और स्वास्थय का गहरा सम्बन्ध है। अच्छे खिलाड़ियों को विज्ञापनों से करोड़ों रुपए प्रतिवर्ष प्राप्त होते हैं। आजकल क्रिकेट जैसे खेलों पर अरबों रुपए का सट्टा लगाया जाता है। यदि खेल न होते तो हानि के साथ अनेक लाभ भी होते।

    (ग) मैं पिछले अनेक वर्षों से कारावास की यातना भोग रहा हूँ। मैं पहले एक निर्दोष बालक था परन्तु एक विशेष घटना के कारण मुझे जेल जाना पड़ा। जेल की स्थिति अत्यन्त शोचनीय है। मैं जेल में परिश्रम और पश्चाताप करते हुए अपना समय व्यतीत कर रहा हूँ।

    (घ) आज महानगर में बढ़ता प्रदूषण आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है जिसके कारण आपको अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका उल्लेख करते हुए बताइए कि बढ़ते हुए प्रदूषण को रोकने में प्रत्येक नागरिक की क्या भूमिका हो सकती है।

    (ङ) जीवन में संगति का अत्यधिक महत्त्व है। संगति का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जीवन में आप यदि सफलता पाना चाहते हैं तो आपको श्रेष्ठ व्यक्तियों की संगति करनी चाहिए।

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  • Question 4

    स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार लाने के लिए नित्य व्यायाम करने की प्रेरणा देते हुए अपने छोटे भाई को पत्र लिखिए। 

    अथवा

    आपके नगर में अनधिकृत मकान बनाए जा रहे हैं, इनकी रोकथाम के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखिए।

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  • Question 5

    निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त क्रियाओं के भेद लिखिए –

    (i) मामा जी ने मीरा को मिठाई दी।

    (ii) शरारती बालक दूसरों को पिटवाता है।

    (iii) वह बैठा है।

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  • Question 6

    निम्नलिखित वाक्यों में से अवयव छाँटिए तथा उनका भेद भी लिखिए –

    (i) वह ज़ोर-ज़ोर से रो रहा था।

    (ii) तुमने स्नान किया या नहीं।

    (iii) चार हाथी जुलूस के आगे चल रहे थे।

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  • Question 7

    निम्नलिखित वाक्यों को मिलाकर सरल, मिश्र और संयुक्त वाक्यों में लिखिए –

    (i) शेर दिखाई दिया।

    (ii) सब लोग डर गए।

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  • Question 8

    निर्देशानुसार वाच्य-परिवर्तन कीजिए –

    (i) महात्मा गाँधी ने शांति और अहिंसा का संदेश दिया। (कर्मवाच्य में)

    (ii) हम इतने दुख नहीं सह सकते। (भाववाच्य में)

    (iii) मुझसे पत्र नहीं लिखा गया। (कर्तृवाच्य में)

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  • Question 9

    (i) निम्नलिखित समासों का विग्रह करके समास का भेद भी लिखिए – (2)

    रात-दिन, ध्यानमग्न

    (ii) निम्नलिखित शब्दों के एकाधिक अर्थ बताइए – (1)

    आराम, द्विज

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  • Question 10

    निम्नलिखित में से किसी एक काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
    (क) हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।
    समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए।
    इक अति चतुर हुते पहिलैं ही, अब गुरु-ग्रंथ पढाए।
    बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-सँदेस पठाए।
    ऊधौ भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए।
    अब अपनै मन फेर पाइ हैं, चलत जु हुते चुराए।
    ते क्यौं अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए।
    राज धरम तौ यहै 'सूर', जो प्रजा न जाहिं सताए।

    (i) श्रीकृष्ण द्वारा योग संदेश भेजने पर गोपियाँ क्या कहती हैं? (2)

    (ii) गोपियाँ पुराने युग के लोगों के बारे में क्या कहती हैं? (2)

    (iii) गोपियाँ 'राजधर्म' के विषय में उद्धव से क्या कहती हैं? (2)

    अथवा

    (ख) बादल, गरजो! –
    घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!
    ललित ललित, काले घुँघराले,
    बाल कल्पना के-से पाले,
    विद्युत-छवि उर में, कवि नवजीवन वाले!
    वज्र छिपा, नूतन कविता
    फिर भर दो –
    बादल, गरजो!

    (i) बादल को बच्चों की कल्पना के समान क्यों कहा गया है? (2)

    (ii) 'घेर घेर घोर गगन' में कोन-सा अलंकार है? (2)

    (iii) 'विद्युत-छवि उर में, कवि, नवजीवन वाले' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (2)

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  • Question 11

    निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन का उत्तर दीजिए – (3 + 3 + 3)

    (i) परशुराम ने सभा के मध्य अपने विषय में क्या कहा?

    (ii) कवि देव ने अपनी कविता में चाँदनी रात की सुंदरता को किन-किन रुपों में देखा है?

    (iii) मृगतृष्णा किसे कहते हैं? 'छाया मत छूना' कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

    (iv) संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं?

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  • Question 12

    निम्नलिखित काव्यांशों में से किसी एक को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

    (क) देखते ही रहोगे अनिमेष!
    थक गए हो?
    आँख लूँ मैं फेर?
    क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार?
    यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनी होती आज
    मैं न सकता देख
    मैं न पाता जान
    तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
    धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य!
    चिर प्रवासी मैं इतर, मैं अन्य!

    (i) इन पंक्तियों में किस छन्द का प्रयोग किया गया है? (1)

    (ii) यदि कवि की पत्नी माध्यम न बनी होती तो वह क्या नहीं देख पाता? (1)

    (iii) कवि स्वयं को 'अन्य' क्यों कहता है? (1)

    (iv) यह पंक्तियाँ हिन्दी साहित्य के किस काल से सम्बन्धित हैं? (1)

    (v) इन पंक्तियों में से कोई दो तत्सम शब्द छाँटकर लिखिए। (1)

    अथवा

    (ख) कौसिक कहा छमिअ अपराधू।
    बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।
    खर कुठार मैं अकरूण कोही।
    आगे अपराधी गुरूद्रोही।।
    उतर देते छोड़ौं बिनु मारे।
    केवल कौसिक सील तुम्हारे।।
    न त येही काटि कुठार कठोरे।
    गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरे।।
    साधिसूनु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।
    अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।

    (i) यह पंक्तियाँ किस भाषा में लिखी गई हैं? (1)

    (ii) 'न त येही काटि कुठार कठोरे' में कौन-सा अलंकार है? (1)

    (iii) यह पंक्तियाँ हिन्दी साहित्य के किस काल से सम्बन्धित हैं? (1)

    (iv) अन्तिम दो पंक्तियों में कौन-से छन्द का प्रयोग किया गया है? (1)

    (v) 'गाधिसूनु कह हृदय हसि मुनिहि हरियारे सूझ' में किस अलंकार का प्रयोग किया गया है? (1)

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  • Question 13

    निम्नलिखित गद्यांशों में से किसी एक के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

    (क) मुफ़स्सिल की पैसेंजर ट्रेन चल पड़ने की उतावली में फूँकार रही थी। आराम से सेकंड क्लास में जाने के लिए दाम अधिक लगते हैं। दूर तो जाना नहीं था। भीड़ से बचकर, एकांत में नयी कहानी के संबंध में सोच सकने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देख सकने के लिए सेकंड क्लास का ही ले लिया।

    गाड़ी छूट रही थी। सेकंड क्लास के एक छोटे डिब्बे को खाली समझकर, ज़रा दौड़कर उसमें चढ़ गए। अनुमान के प्रतिकूल डिब्बा निर्जन नहीं था। एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे। सामने दो ताज़े-चिकने खीरे तौलिए पर रखे थे। डिब्बे में हमारे सहसा कूद जाने से सज्जन की आँखों में एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष दिखाई दिया। सोचा, हो सकता है, यह भी कहानी के लिए सूझ की चिंता में हों या खीरे-जैसी अपदार्थ वस्तु का शौक करते देखे जाने के संकोच में हों।

    नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया। हमने भी उनके सामने की बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं।

    ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। नवाब साहब की असुविधा और संकोच के कारण का अनुमान करने लगे। संभव है, नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफ़ायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो और अब गवारा न हो कि शहर का कोई सफ़ेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफ़र करता देखे।...... अकेले सफ़र का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे और अब किसी सफ़ेदपोश के सामने खीरा कैसे खाएँ?

    हम कनखियों से नवाब साहब की ओर देख रहे थे। नवाब साहब कुछ देर गाड़ी की खिड़की से बाहर देखकर स्थिति पर गौर करते रहे।

    (i) लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों लिया? (2)

    (ii) लेखक को देखकर नवाब साहब को असुविधा क्यों हुई? (2)

    (iii) लेखक के मन में नवाब साहब को देखकर कौन-से विचार उमड़े? (2)

    अथवा


    (ख) पढ़ने-लिखने में स्वयं कोई बात ऐसी नहीं जिससे अनर्थ हो सके। अनर्थ का बीज उसमें हरगिज़ नहीं। अनर्थ पुरूषों से भी होते हैं। अपढ़ों और पढ़े-लिखों, दोनों से। अनर्थ दुराचार और पापाचार के कारण और ही होते हैं और वे व्यक्ति-विशेष का चाल-चलन देखकर जाने भी जा सकते हैं। अतएव स्त्रियों को अवश्य पढ़ाना चाहिए।

    जो लोग यह कहते हैं कि पुराने ज़माने में यहाँ स्त्रियाँ न पढ़ती थीं अथवा उन्हें पढ़ने की मुमानियत थी वे या तो इतिहास से अभिज्ञता नहीं रखते या जान-बूझकर लोगों को धोखा देते हैं। समाज की दृष्टि में ऐसे लोग दंडनीय हैं। क्योंकि स्त्रियों को निरक्षर रखने का उपदेश देना समाज का अपकार और अपराध करना है –समाज की उन्नति में बाधा डालना है।

    'शिक्षा' बहुत व्यापक शब्द है। उसमें सीखने योग्य अनेक विषयों का समावेश हो सकता है। पढ़ना-लिखना भी उसी के अंतर्गत है। इस देश की वर्तमान शिक्षा-प्रणाली अच्छी नहीं। इस कारण यदि कोई स्त्रियों को पढ़ाना अनर्थकारी समझे तो उसे उस प्रणाली का संशोधन करना या कराना चाहिए, खुद पढ़ने-लिखने को दोष न देना चाहिए। लड़कों ही की शिक्षा-प्रणाली कौन-सी बड़ी अच्छी है। प्रणाली बुरी होने के कारण क्या किसी ने यह राय दी है कि सारे स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए जाएँ? आप खुशी से लड़कियों और स्त्रियों की शिक्षा की प्रणाली का संशोधन कीजिए। उन्हें क्या पढ़ाना चाहिए, कितना पढ़ाना चाहिए, किस तरह की शिक्षा देनी चाहिए और कहाँ पर देनी चाहिए –घर में या स्कूल में –इन सब बातों पर बहस कीजिए, विचार कीजिए, जी में आवे सो कीजिए; पर परमेश्वर के लिए यह न कहिए कि स्वयं पढ़ने-लिखने में कोई दोष है –वह अनर्थकर है, वह अभिमान का उत्पादक है, वह गृह-सुख का नाश करने वाला है। ऐसा कहना सोलहों आने मिथ्या है।

    (i) क्या स्त्रियों को शिक्षा देने से दुराचार की वृद्धि होती है? (2)

    (ii) लेखक ने कैसे लोगों को दंडनीय माना है? (2)

    (iii) क्या केवल पढ़ना-लिखना ही शिक्षा के अंतर्गत आता है? (2)

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  • Question 14

    निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए – (3 + 3 + 3)

    (i) फ़ादर बुल्के भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग हैं –किस आधार पर ऐसा कहा गया है?

    (ii) पुराने समय में स्त्रियों द्वारा प्राकृत भाषा में बोलना क्या उनके अपढ़ होने का सबूत है –पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

    (iii) सुषिर वाद्यों से क्या अभिप्राय है? शहनाई को 'सुषिर वाद्यों' में शाह की उपाधि क्यों दी गई होगी?

    (iv) न्यूटन को संस्कृत मानव कहने के पीछे कौन-से तर्क दिए गए हैं। न्यूटन द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों एवं ज्ञान की कई दूसरी बारीकियों को जानने वाले लोग भी न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकते, क्यों?

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  • Question 15

    (i) गरमी की उमस भरी संध्याएँ भी भगत के स्वरों को निढाल नहीं कर पाती थीं। इस कथन के आलोक में भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए।  (3)

    (ii) मंदिर में शहनाई बजाने से प्राप्त धन को बिस्मिल्ला खाँ कैसे खर्च करते थे? (2)

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  • Question 16

    निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए –

    (i) झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस प्रकार सम्मोहित कर रहा था?

    (ii) 'माता का आँचल' रचना में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं?

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  • Question 17

    निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए – (2 + 2 + 2)

    (i) गंतोक में बौद्ध धर्म के अनुयायी की मृत्यु के पश्चात उसकी आत्मा की शांति के लिए क्या किया जाता है?

    (ii) 'कवी लौंग स्टॉक' के विषय में आप क्या जानते हैं?

    (iii) कठोर हृदय समझी जाने वाली दुलारी टुन्नू की मृत्यु पर क्यों विचलित हो उठी?

    (iv) जार्ज पंचम की लाट की नाक को पुन: लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या-क्या यत्न किए?

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