anuched on dada gi ka chashma

मित्र हम इस विषय पर आरंभ करके दे रहे हैं। आशा करते हैं कि यह आपकी सहायता करेगा। आप इसे आधार बनाकर स्वयं लिखने का प्रयास करें-
मैं और दादाजी सबसे अच्छे दोस्त हैं। माताजी चूंकि स्कूल में पढ़ाती हैं, तो दादाजी ने ही उनकी अनुपस्थिति में मुझे पाला-पोसा है। मैं उनसे बहुत प्रेम करता हूँ। वह मेरे प्यारे दादाजी भी हैं और एक अच्छे दोस्त भी हैं। मेरे दादाजी की आँखें कमज़ोर हैं। अतः वे सदैव चश्मा पहने रखते हैं। उनका चश्मा मोटे प्रेम का और काले रंग का है। उसे पहनकर वह किसी बड़े नेता से जान पड़ते हैं। मैंने कभी मेरे दादाजी को बिना चश्मे के नहीं देखा है। मुझे खिलाते समय, नहलाते समय, खेलते समय, पढ़ाते समय, सुलाते समय हमेशा चश्मा उनके साथ रहा है। एक दिन मुझे एक शरारत सुझी कि मैं उनका चश्मा छुपा देता हूँ। बस क्या था मैंने चश्मा छुपा दिया।........  

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