Bhasha ka mool roop kya hai?

मित्र भाषा का मूल रूप बोली होता है। वह एक छोटे क्षेत्र में बोली जाती है। जब वह बोली बड़ी व्यापक रूप में बहुत बड़े भू-भाग में बोली जाती है, तो वह भाषा का रूप धारण कर लेती है।

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