अपनी कॉलोनी में किसी सामाजिक संस्था द्वारा खोले गए पुस्तकालय की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए

4/37, जनकपुरी,
नई दिल्ली।
दिनांक
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प्रिय अमन,
बहुत प्यार!
तुम्हारा पत्र मिला पता चला कि तुमने अपने यहाँ एक सरकारी पुस्तकालय की सदस्यता ले ली है। यह जानकर बहुत अच्छा लगा।
पुस्तकालय की उपयोगिता हमारे जीवन में बहुत है। पुस्तकालय में हर विषय और देश से संबंधित पुस्तकें होती हैं। अत: मनुष्य की ज्ञान संबंधी पिपासा पुस्तकालय में ही शांत हो सकती है। पुस्तकालयों में धार्मिक, राजनैतिक, सामाजिक, साहित्य, चिकित्सा संबंधी सभी पुस्तकों को संग्रहित करके रखा जाता है इसलिए यह हर वर्ग की पुस्तकों संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता है और सबकी पहली पसंद भी होता है।
हमारी गली में भी एक सामाजिक संस्था पुकार ने अपना पुस्तकालय खोला है। ये पुस्तकालय सभी लोगों के लिए हैं। मामूली-सा शुल्क भरकर इसका लाभ उठाया जा सकता है। जिन लोगों द्वारा मंहगी पुस्तकें नहीं खरीदी जा सकती हैं, वे इस पुस्तकालय से पुस्तकें ले सकते हैं। इसमें पढ़ने की भी व्यवस्था है। यहाँ के शांत वातावरण में पुस्तकों का अध्ययन करना बड़ा ही अच्छा लगता है। एक स्थान पर विभिन्न तरह की पुस्तकें सरलता से मिल जाती है। मैं तो इसका सदस्य बनकर बहुत ही प्रसन्न हूँ।
 

तुम्हारा मित्र,
विपिन

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