Sudama Krishna Prasang in sanskrit

सुदामा अपनी पत्नी सुशीला के कहने से अपने परम मित्र 'श्री कृष्ण, से मिलने द्वारिका नगरी गये,तो उनके मित्र भगवान श्री कृष्ण ने उनके आतिथ्य सत्कार के साथ -साथ उनके आत्म -सम्मान और उनके सवाभिमान का भी पूरा ध्यान रखा | जो भगवान श्री कृष्ण के अनुसार'' एक भक्त की भक्ति का सम्मान करना भगवान का परम कार्य है |,तो जैसे ही सुदामा अपने मित्र श्री कृष्ण के द्वार पर पहुंचे,कृष्ण ने सुदामा को 'हे मित्र सुदामा, कहकर गले से लगा लिया था | मित्र की ये दशा देख कर' करुणासागर ,ने अपने आंसुओ से ही उनके पैर धो दिए थे |सुदामा के फटे वस्त्र धोने के लिये दे दिए,और उन्हें अपने नए वस्त्र पहनाये | फिर सोने के थाल मे भोजन लाकर के कहा 'मित्र सुदामा अब आप भोजन करे ,तब सुदामा ने कहा 'आप भी मेरे साथ खाना खाहिए , नहीं सुदामा मै तुम्हारे साथ नहीं खाऊंगा , ऐसा इसलिए नहीं कहा कि भागवान कृष्ण अपने गरीब मित्र सुदामा के साथ नहीं खाना चाहते थे, वो तो उनका झूठा खाना चाहते थे 
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