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Anubhab Mandal asked a question
Subject: Hindi, asked on on 23/6/14
Rituraj Joshi asked a question
Subject: Hindi, asked on on 10/4/14
Vineet Singh asked a question
Subject: Hindi, asked on on 20/5/12
Pramod Beniwal asked a question
Subject: Hindi, asked on on 14/9/11
Uma asked a question
Subject: Hindi, asked on on 21/4/14
Yash asked a question
Subject: Hindi, asked on on 5/6/19
Neha & 2 others asked a question
Subject: Hindi, asked on on 6/5/15
Muskan Saxena asked a question
Subject: Hindi, asked on on 17/4/13
Ananya Sisodia asked a question
Subject: Hindi, asked on on 23/7/13
Toshith Vats asked a question
Subject: Hindi, asked on on 22/4/14
Anubhab Mandal asked a question
Subject: Hindi, asked on on 2/7/14
Sakshi asked a question
Subject: Hindi, asked on on 11/4/15
Hoori asked a question
Subject: Hindi, asked on on 5/9/17
dear experts pls answer marked questions.
1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए-
कुछ लोगों के अनुसार मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य धन–संग्रह है। नीतिशास्त्र में धन–संपत्ति आदि को ही 'अर्थ' कहा गया है। बहुत से ग्रंथों में अर्थ की प्रशंसा की गई है; क्योंकि सभी गुण अर्थ अर्थात धन के ही आश्रित हैं। जिसके पास धन है वही सुखी रह सकता है, विषय भोगों को संगृहीत कर सकता है तथा दान–धर्म भी निभा सकता है। वर्तमान
युम में धन का सबसे अधिक महत्त्व है। आज हमारी आवश्यकताएँ बहुत बढ़ गई हैं, इसलिए उनको पूरा करने के लिए धन–संग्रह की आवश्यकता पड़ती है। धन की प्राप्ति के लिए भी अत्यधिक प्रयत्न करना पड़ता है तथा सारा जीवन इसी में लगा रहता है। कुछ लोग तो धनोपार्जन को ही जीवन का उद्देश्य बनाकर उचित–अनुचित साधनों का भेद भी भुला बैठते हैं। संसार के इतिहास में धन की लिप्सा के कार् जितनी हिंसा, अनर्थ और अत्याचार हुए हैं, उतने और किसी दूसरे कारण से नहीं हुए हैं। अतः धन को जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य नहीं माना जा सकता क्योंकि धन अपने–आप में मूल्यवान वस्तू नहीं है। धन को संचित करने के लिए छल–कपट आदि का सहारा लेना पड़ता है, जिसके कारण जीवन में अशांति और चेहरे पर विकृति बनी रहती है। इतना ही नहीं इसके संग्रह की प्रवृत्ति के कारण सदा चोर, डाकू तथा दुश्मनों का भय बना रहता है। धन का अपहरण होने या नाश होने पर कष्ट होता है। इस प्रकार  शांति, संघर्ष, दुष्प्रवृत्ति, दुख, भय एवं पाप आदि के मूल होने का कारण, धन को जीवन का परमलक्ष्य नहीं माना जा सकता।
च–   ​अ– उचित शीर्षक बताइए।
    ​    ​ब– धनोपार्जन और धन–संग्रह में अंतर स्पष्ट कीजिए।​
Aaheli Ghosh Hazra asked a question
Subject: Hindi, asked on on 5/9/18
kavyapadman.24... asked a question
Subject: Hindi, asked on on 27/6/11
Ujjainee Das asked a question
Subject: Hindi, asked on on 15/1/15
Vidula Pagar asked a question
Subject: Hindi, asked on on 31/8/14
Raj Kumar asked a question
Subject: Hindi, asked on on 11/4/17
Raghavendra Rathore asked a question
Subject: Hindi, asked on on 28/4/16
Naveenkumar asked a question
Subject: Hindi, asked on on 24/8/13
Raja Shekar asked a question
Subject: Hindi, asked on on 10/8/11
Tejal Sahu asked a question
Subject: Hindi, asked on on 19/4/16
Harsh Malik asked a question
Subject: Hindi, asked on on 30/4/13
Raj Kumar asked a question
Subject: Hindi, asked on on 11/4/17
Abhisek Mohapatra asked a question
Subject: Hindi, asked on on 29/5/18
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