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Board Paper of Class 10 2006 Hindi (SET 2) - Solutions

(i) इस प्रश्न-पत्र के चार खण्ड हैं क, ख, ग और घ।
(ii) चारों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
(iii) यथासंभव प्रत्येक खण्ड के उत्तर क्रमश: दीजिए।
  • Question 1

    निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए – 

    'गोदान' में होरी की करुण मृत्यु के पश्चात् हृदय एकबारगी विदीर्ण हो गया था। 'गोदान' एक नहीं अनेक बार पढ़ा और दिल हर बार चाक-चाक हुआ। संवेदना-विचलित हृदय कहता था, "काश होरी न मरे!" हम उसे क्यों जीवित देखना चाहते थे? क्योंकि वह इतना अच्छा इंसान था। पाठक को प्रतीत होता था कि होरी की हार उसकी अपनी हार है, मानवता की हार है।

    यह एक असहनीय विडंबना प्रतीत होती थी कि निरीह होरी का शोषण करने वाली दातादीन प्रभृति जोंकें तो जीवित थीं, जबकि वह सरल, प्रेममय और धर्मभीरु इंसान वृद्धावस्था में भी गिट्टी तोड़ते-तोड़ते मर गया।

    फिर भी, एक बार मर गया तो बात खत्म हो जानी चाहिए थी। भला हो प्रेमचंद जी की धन्य लेखनी का कि बरसों तक होरी की मृत्यु सालती रही। समय के साथ-साथ वह पीड़ा हलकी होती गई, विस्मृत-सी हो गई। 'गोदान' पढ़े हुए आज लगभग 30 वर्ष हो गए, फिर भी कभी-कभी कल्पना में धनिया की वह मूर्ति साकार करुणा बन कर आँखों के सामने आ जाती है जब वह क्रूर पंडित की हथेली पर सुतली कात कर मिले पैसे रख देती है और "महाराज, यही है इनका गोदान" कह कर पछाड़ खाकर गिर जाती है। होरी तो जीवन से छुटकारा पा गया किंतु क्या हम होरी से छुटकारा पा सके?

    भारत की क्रूर नौकरशाही को होरी को एक बार मृत्यु के मुख ढकेल कर संतोष नहीं हुआ। आश्चर्य की बात है कि भारत में होरी रोज़-रोज़ मर रहा है, रक्तबीज की तरह शत-सहस्र रुप धारण करके मर रहा है। आपको विश्वास न हो तो अखबार को ज़रा आँख खोल कर पढ़िए तो आपको पन्ने-पन्ने पर होरी मरते हुए दिखाई देंगे। मैं विदर्भ की बात लेती हूँ। इस क्षेत्र में जून 2005 से अक्टूबर के तीसरे सप्ताह तक 1000 किसानों ने आत्महत्या की। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश के आँकड़े भी कमोबेश इतने ही दर्द भरे और शर्मनाक हैं। इस बार विदर्भ के गाँवों में अँधेरी दीपावली न हुई। भोजन जुटाने का साधन न हो, कर्ज़ चुकाने की हैसियत न हो, बच्चों की सिसकती आँखें दो रोटी नहीं, बस दो टुकड़े माँगती हों, तब कैसी दीवाली, कैसा त्यौहार?

    प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विदर्भ के किसानों के लिए हज़ारों-करोड़ों के अनुदान का घोष किया। उसके बाद से 20 अक्टूबर तक 392 किसानों ने आत्महत्या की। सभी जानते हैं कि सरकारी सहायता का अधिकाँश घूसखोर अफ़सरों की जेबों में पहुँचता है। साथ ही ये नौकरशाह सहायता-वितरण का अतिरिक्त कार्यभार क्यों उठाएँ, जबकि वे काम करें या न करें, उनका वेतन-भत्ता, सुविधाएँ संविधान द्वारा सुरक्षित हैं। कुछ वर्ष पूर्व उड़ीसा में आए चक्रवात में देश के सहृदय नागरिकों द्वारा भेजी गई सहायता सामग्री के ट्रक के ट्रक इन सरकारी नौकरों ने अपने उपयोग में आने वाली वस्तुएँ निकाल कर, शेष सामग्री को वितरण के सिरदर्द से बचने के लिए, नदियों के तलों में द़फन कर दिया था। क्या सरकारी नौकरी में आते ही अधिकांश व्यक्तियों की संवेदना तथा नैतिकता मर जाती है? 14 दिसंबर 2006 के डेकेन क्रॉनिकल में नैशनल एग्रीकल्चरल कुऑपरेटिव मार्केटिंग फ़ैडरेशन ऑफ़ इंडिया द्वारा किए गए घोटालों का उल्लेख है जिन्होंने एम.एफ.हुसैन का एक चित्र 100 करोड़ रुपयों में खरीदा है। सेना को मनुष्यों के खाने के अयोग्य दाल बेची है। लेख के अनुसार भ्रष्ट अफ़सरों ने हज़ारों करोड़ रुपयों की संपत्ति बना ली है। सहस्रों किसान आत्महत्या करते रहें, किंतु इन भ्रष्ट अधिकारियों की धन-लिप्सा में कोई कमी नहीं आती।

    विदर्भ जन आंदोलन समिति का कहना है कि इस वर्ष की खरीफ़ फसल के बाद स्थिति पिछले वर्ष से अधिक बिगड़ गई है। गत वर्ष 1 जून से 20 अक्टूबर तक विदर्भ के केवल 91 किसानों ने आत्महत्या की थी जबकि इस वर्ष इतने ही समय में 460 किसानों ने आत्महत्या की। सरकार ने कपास के लिए जो कीमत निर्धारित की है उससे स्थिति और भी बिगड़ गई है। 1971 में एक किसान एक क्विंटल कपास की बिक्री के द्वारा एक तोला सोना खरीद सकता था, इसी कारण कपास को सफ़ेद सोना कहा जाता था। आज एक क्विंटल कपास बेच कर मात्र एक चौथाई तोला सोना खरीदा जा सकता है; अर्थात विगत 35 वर्षों में कपास के किसानों की आय घट कर एक चौथाई रह गई है।

    इस विंडबना का मूल वही है जो होरी के काल में था–कर्ज़ और कर्ज़ पर सूद की 400-500 प्रतिशत दर। जी हाँ, आज भारतीय गाँवों में ब्याज की दरे इतनी अधिक हैं कि आज के खटमल महाजन दातादीन प्रभृति प्रेमचंद कालीन सूदखोरों को बहुत पीछे छोड़ देते हैं। मेरे एक संबंधी बहुत सच्चे समाजसेवी हैं। वे 500 गाँवों के निवासियों को सूदखोरों के चंगुल से मुक्त कराने में एक बड़ी सीमा तक सफल हुए हैं। उन्होंने चक्रवर्ती ब्याज के जो आँकड़े मुझे सुनाए उन्हें सुन कर दिल सकते में आ गया। हाय, मुहम्मद यूनूस सदृश व्यक्ति भारत के गाँव-गाँव में क्यों नहीं है?

    पंजाब को ही लें। अकाली दल के नेता कह रहे हैं कि पंजाब के किसानों के ऊपर 35,000 करोड़ ऋण है जबकि भूतपूर्व मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह के अनुसार ऋण केवल 25,000 करोड़ है। यह स्थिति तो जब है कि सरकार 8 रुपए यूनिट की दर से बिजली खरीद कर किसानों को पंप चलाने के लिए मुफ़्त दे रही है। स्थिति इतनी पेचीदा है कि किसी एक सुधार द्वारा स्थिति को सुधारा नहीं जा सकता। सूदखोरों को सूद का लालच, सरकार को वोट का लालच, किसानों को अति लाभ का लालच–परिणति है निराशा और मृत्यु। हाँ, आज गाँव-गाँव में सहस्रों होरी मर रहे हैं।

    (i) लेखिका क्यों चाहती थी कि होरी की मृत्यु न हो? (2)

    (ii) लेखिका की आँखों के सामने धनिया का रुप बार-बार क्यों उभरता है? (2)

    (iii) इस बार विदर्भ के गाँवों में दीपावली क्यों फीकी रही? (2)

    (iv) निर्धनों को दी गई सरकारी सहायता के बावजूद उनकी स्थिति में परिवर्तन क्यों नहीं होता? (2)

    (v) उपरोक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए? (2)

    (vi) 'विडंबना' और 'धर्मभीरु' शब्दों को अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए? (2)

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  • Question 2

    निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
    उसके बाद सर्दियाँ आ जायेंगी।
    और मैंने देखा है कि सर्दियाँ जब भी आती हैं
    तो माँ थोड़ा और झुक जाती है
    अपनी परछाई की तरफ
    ऊन के बारे में उसके विचार
    बहुत सख्त हैं
    मृत्यु के बारे में बेहत कोमल
    पक्षियों के बारे में
    वह कभी कुछ नहीं कहती
    हालाँकि नींद में
    जब वह बहुत ज़्यादा थक जाती है
    तो उठा लेती है सुई और तागा
    मैंने देखा है कि जब सब सो जाते हैं
    तो सुई चलाने वाले उसके हाथ
    देर रात तक
    समय को धीरे-धीरे सिलते हैं
    जैसे वह मेरा फटा हुआ कुर्ता हो
    पिछले साठ बरसों से
    एक सुई और तागे के बीच
    दबी हुई है माँ
    हालाँकि वह खुद एक करघा है
    जिस पर साठ बरस बुने गये हैं
    धीरे-धीरे तह पर तह
    खूब मोटे और गझिन और खुरदरे
    साठ बरस

    (i) जब माँ थक जाती है तो वह क्या करती है? (2)

    (ii) 'खूब मोटे और गझिन और खुरदरे साठ बरस' का आशय स्पष्ट कीजिए? (2)

    (iii) 'सर्दियाँ जब भी आती हैं तो माँ थोड़ा और झुक जाती है' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (2)

    (iv) उपरोक्त पंक्तियों के आधार पर माँ की स्थिति का वर्णन कीजिए। (2)

    अथवा

    मुहल्ले में वह शांति बेचता है
    लाउडस्पीकरों की
    एक दुकान है उसकी
    मेरे घर से बिल्कुल लगी हुई।
    सुबह-सुबह मुँह अंधेरे दो घंटे
    लाउडस्पीकर न बजाने के
    वह मुझसे सौ रुपये महीने लेता है
    वह जानता है कि मैं
    उन अभागों में से हूँ
    जो शांति के बिना
    जीवित नहीं रह सकते।
    वह जानता है कि आने वाले वक्तों में
    साफ पानी और साफ हवा से भी ज़्यादा
    शांति की किल्लत रहेगी।
    वह जानता है
    कि क्रांति के ज़माने अब लद चुके :
    अब उसे अपना पेट पालने के लिए
    शांति का धंधा अपनाना है।
    मैं उसका आभारी हूँ
    भारत जैसे देश में जहाँ कीमतें आसमान
    छू रहीं
    सौ रुपए महीने की दर से
    अगर दो घंटा रोज़ भी शांति मिल सके
    तो महँगी नहीं।

    (i) इस कविता में कवि ने स्वयं को अभागा क्यों कहा है? (2)

    (ii) इस कविता में कवि व्यापारी को किस लिए सौ रुपए महीना देता है? (2)

    (iii) आने वाले समय में साफ पानी और साफ हवा की अपेक्षा किस वस्तु की अधिक कमी रहेगी? (2)

    (iv) 'क्रान्ति के ज़माने अब लद चुके' का आशय स्पष्ट कीजिए। (2)

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  • Question 3

    निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों का निबन्ध लिखिए –

    (क) घर बालक की प्रारम्भिक पाठशाला होती है। माता-पिता प्रथम शिक्षक होते हैं। विद्यालय में शिक्षक ही माता-पिता होते हैं। शिक्षक का दायित्व पढ़ाना तथा सत्यकार्यों के लिए प्रेरणा देना होता है। छात्रों का भी परिवार तथा समाज के प्रति दायित्व होता है। इन तथ्यों के आधार पर छात्र और शिक्षक विषय पर निबन्ध लिखिए।

    (ख) प्रकृति और मानव का सम्बन्ध बहुत गहरा है। सुन्दर प्राकृतिक स्थलों को देखकर मानव को आनंद मिलता है। आपने कुछ समय पूर्व कौन से प्राकृतिक स्थल की यात्रा की। वहाँ जाने का आपको कब और कैसे अवसर मिला। वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन कीजिए।

    (ग) आलसी व्यक्ति ही दैव (भाग्य) का सहारा लेता है। भाग्यवादी निकम्मा होता है तथा विघ्न-बाधाओं का मुकाबला करने से डरता है। ऐसे व्यक्ति निराश, उदासीन और पराश्रित रहते हैं। वस्तुत: परिश्रम ही सौभाग्य का निर्माता है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर 'दैव-दैव आलसी पुकारा' विषय पर निबन्ध लिखिए।

     

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  • Question 4

    बाल भवन, उदयपुर के विवेक व्यास की ओर से उसके मित्र के पिता की असामयिक मृत्यु पर एक संवेदना पत्र लिखिए।

    अथवा

    कावेरी छात्रावास के अधीक्षक को अनुराधा की ओर से पत्र लिखकर, छात्रावास की भोजनशाला के निरंतर गिरते स्तर की ओर उनका ध्यान आकृष्ट कीजिए।

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  • Question 5

    निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त क्रियाओं के भेद लिखिए –

    (i) रीता घर आती है।

    (ii) मैंने उसे मामा से मिलवाया।

    (iii) मोहन पढ़ता है।

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  • Question 6

    निर्देशानुसार उत्तर दीजिए – 

    (i) मोहन और राधा एक ही विद्यालय में पढ़ते हैं। (समुच्चयबोधक छाँटिए)

    (ii) मनोहर यहाँ आया था। (क्रिया विशेषण छाँटिए)

    (iii) परीक्षा से पहले खूब पढ़ो। (संबंधबोधक छाँटिए)

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  • Question 7

    निम्नलिखित वाक्यों में निर्देशानुसार परिवर्तन कीजिए –

    (i) राम जा रहा है। मोहन जा रहा है। (सरल वाक्य में)

    (ii) रहीम बोला। मैं कर्नाटक जा रहा हूँ। (मिश्रित वाक्य में)

    (iii) वह आया। उसने कुछ नहीं कहा। (संयुक्त वाक्य में)

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  • Question 8

    निर्देशानुसार वाच्य-परिवर्तन कीजिए – 

    (i) लड़का तैरता है। (भाववाच्य में)

    (ii) रमेश द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है। (कर्तृवाच्य में)

    (iii) श्याम पत्र लिखता है। (कर्मवाच्य में)

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  • Question 9

    (क) निम्नलिखित शब्दों का समास विग्रह कीजिए और उसका भेद भी बताइए – (2)

    कमलनयन, राजपुत्री

    (ख) 'कर' तथा 'द्विज' शब्द के एक से अधिक अर्थ लिखिए – (1)

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  • Question 10

    निम्नलिखित में से किसी एक काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
    (क) नाथ संभुधनु भंजनिहारा
    होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।
    आयेसु काह कहिअ किन मोही।
    सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।
    सेवकु सो जो करै सेवकाई।
    अरिकरनी करि करिअ लराई।।
    सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा।
    सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।।
    सो बिलगाउ बिहाइ समाजा।
    न त मारे जैहहिं सब राजा।।
    सुनि मुनिबचन लखन मुसकाने।
    बोले परसुधरहि अवमाने।।
    बहु धनुही तोरी लरिकाईं।
    कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।
    येहि धनु पर ममता केहि हेतू।
    सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।।
    रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभार।
    धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार।।

    (i) धनुष टूटने के पश्चात परशुराम ने क्या कहा? (2)

    (ii) परशुराम के वचन सुनकर लक्ष्मण क्यों मुसकाए? (2)

    (iii) लक्ष्मण ने परशुराम से क्या कहा? (2)

    अथवा

    (ख) छाया मत छूना
    मन, होगा दुख दूना।
    यश है न वैभव है, मान है न सरमाया;
    जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया।
    प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,
    हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।
    जो है यथार्थ कठिन उसका तू कर पूजन-
    छाया मत छूना
    मन, होगा दुख दूना।

    (i) 'छाया मत छूना' का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए? (2)

    (ii) प्रत्येक चंद्रिका में काली रात कैसे छिपी रहती है? (2)

    (iii) व्यक्ति को कठिन यथार्थ का पूजन क्यों करना चाहिए? (2)

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  • Question 11

    निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन का उत्तर दीजिए – (3 + 3 + 3)

    (i) देव कवि ने 'ब्रजदूलह' किसके लिए प्रयुक्त किया है और उन्हें संसार रुपी मंदिर का दीपक क्यों कहा है?

    (ii) 'यह दंतुरित मुसकान' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है?

    (iii) 'कन्यादान' कविता में लड़की की जो छवि आपके सामने उभर कर आती है, उसे शब्द-बद्ध कीजिए।

    (iv) संगतकार किन-किन रुपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं?

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  • Question 12

    निम्नलिखित काव्यांशों में से किसी एक को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए – 
    (क) डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,
    सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।।
    पवन झुलावै, केकी-कीर बरतावैं 'देव',
    कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै।।
    पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,
    कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।।
    मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,
    प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।। 

    (i) 'मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि' में कौन-सा अलंकार है? (1)

    (ii) इन पंक्तियों में किस छंद का प्रयोग किया गया है? (1)

    (iii) कवि ने किसे पालना और बिछौना कहा है? (1)

    (iv) इन पंक्तियों में किस भाषा का प्रयोग किया गया है? (1)

    (v) इन पंक्तियों में बसंत का वर्णन किस रुप में किया गया है? (1)

    अथवा

    (ख) गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
    खो चुका होता है
    या अपने ही सरगम को लाँघकर
    चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
    तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है
    जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
    जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन
    जब वह नौसिखिया था।

    (i) जब मुख्य गायक जटिल तानों के जंगल में खो जाता है तो संगतकार क्या करता है? (1)

    (ii) इन पंक्तियों में किस छंद का प्रयोग किया गया है? (1)

    (iii) इन पंक्तियों का सम्बन्ध हिन्दी साहित्य के किस काल से है? (1)

    (iv) इन पंक्तियों में से कोई दो तत्सम शब्द छाँटकर लिखिए। (1)

    (v) संगतकार मुख्य गायक को उसके बचपन की याद कैसे दिलाता है? (1)

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  • Question 13

    निम्नलिखित गद्यांशों में से किसी एक गद्यांश के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए – 

    (क) लेकिन भाई! एक बात अभी भी समझ नहीं आई। हालदार साहब ने पानवाले से फिर पूछा, नेताजी का ओरिजिनल चश्मा कहाँ गया?

    पानवाला, दूसरा पान मुँह में ठूँस चुका था। दोपहर का समय था, 'दुकान' पर भीड़-भाड़ अधिक नहीं थी। वह फिर आँखों-ही-आँखों में हँसा। उसकी तोंद थिरकी। कत्थे की डंडी फेंक, पीछे मुड़कर उसने नीचे पीक थूकी और मुस्कुराता हुआ बोला, मास्टर बनाना भूल गया।

    पानवाले के लिए यह एक मज़ेदार बात थी लेकिन हालदार साहब के लिए चकित और द्रवित करने वाली। यानी वह ठीक ही सोच रहे थे। मूर्ति के नीचे लिखा 'मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल' वाकई कस्बे का अध्यापक था। बेचारे ने महीने-भर में मूर्ति बनाकर पटक देने का वादा कर दिया होगा। बना भी ली होगी, लेकिन पत्थर में पारदर्शी चश्मा कैसे बनाया जाए–काँचवाला–यह तय नहीं कर पाया होगा। या कोशिश की होगी और असफल रहा होगा। या बनाते-बनाते 'कुछ और बारीकी' के चक्कर में चश्मा टूट गया होगा। या पत्थर का चश्मा अलग से बनाकर फिट किया होगा और वह निकल गया होगा। उफ़...!

    हालदार साहब को यह सब कुछ बड़ा विचित्र और कौतुकभरा लग रहा था। इन्हीं खयालों में खोए-खोए पान के पैसे चुकाकर, चश्मेवाले की देश-भक्ति के समक्ष नतमस्तक होते हुए वह जीप की तरफ़ चले, फिर रुके, पीछे मुड़े औऱ पानवाले के पास जाकर पूछा, क्या कैप्टन चश्मेवाला नेताजी का साथी है? या आज़ाद हिंद फ़ौज का भूतपूर्व सिपाही?

    पानवाला नया पान खा रहा था। पान पकड़े अपने हाथ को मुँह से डेढ़ इंच दूर रोककर उसने हालदार साहब को ध्यान से देखा, फिर अपनी लाल-काली बत्तीसी दिखाई और मुसकराकर बोला–नई साब! वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल! वो देखो, वो आ रहा है। आप उसी से बात कर लो। फ़ोटो-वोटो छपवा दो उसका कहीं।

    हालदार साहब को पानवाले द्वारा एक देशभक्त का इस तरह मज़ाक उड़ाया जाना अच्छा नहीं लगा। मुड़कर देखा तो अवाक् रह गए। एक बेहद बूढ़ा मरियल-सा लँगड़ा आदमी सिर पर गांधी टोपी और आँखों पर काला चश्मा लगाए एक हाथ में एक छोटी-सी संदूकची और दूसरे हाथ में एक बाँस पर टँगे बहुत-से चश्मे लिए अभी-अभी एक गली से निकला था और अब एक बंद दुकान के सहारे अपना बाँस टिका रहा था। तो इस बेचारे की दुकान भी नहीं! फेरी लगाता है! हालदार साहब चक्कर में पड़ गए। पूछना चाहते थे, इसे कैप्टन क्यों कहते हैं? क्या यही इसका वास्तविक नाम है? लेकिन पानवाले ने साफ़ बता दिया था कि अब वह इस बारे में और बात करने को तैयार नहीं। ड्राइवर भी बैचेन हो रहा था। काम भी था। हालदार साहब जीप में बैठकर चले गए।

    (i) हालदार साहब ने पानवाले से क्या पूछा? (11/2)

    (ii) हालदार साहब ने नेताजी के चश्मे के बारे में क्या सोचा?  (11/2)

    (iii) पानवाले के कैप्टन के विषय में क्या कहा?  (11/2)

    (iv) कैप्टन कौन था? उसके व्यक्तित्व का वर्णन कीजिए  (11/2)

    अथवा

    (ख) जो शब्द सबसे कम समझ में आते हैं और जिनका उपयोग होता है सबसे अधिक; ऐसे दो शब्द हैं सभ्यता और संस्कृति।

    इन दो शब्दों के साथ जब अनेक विशेषण लग जाते हैं, उदाहरण के लिए जैसे भौतिक-सभ्यता और आध्यात्मिक-सभ्यता, तब दोनों शब्दों का जो थोड़ा बहुत अर्थ समझ में आया रहता है, वह भी गलत-सलत हो जाता है। क्या यह एक ही चीज़ अथवा दो वस्तुएँ? यदि दो हैं तो दोनों में क्या अंतर है? हम इसे अपने तरीके पर समझने की कोशिश करें।

    कल्पना कीजिए उस समय की जब मानव समाज का अग्नि देवता से साक्षात नहीं हुआ था। आज तो घर-घर चूल्हा जलता है। जिस आदमी ने पहले पहल आग का आविष्कार किया होगा, वह कितना बड़ा आविष्कर्ता होगा!

    अथवा कल्पना कीजिए उस समय की जब मानव को सुई-धागे का परिचय न था, जिस मनुष्य के दिमाग में पहले-पहल बात आई होगी कि लोहे के एक टुकड़े को घिसकर उसके एक सिरे को छेदकर और छेद में धागा पिरोकर कपड़े के दो टुकड़े एक साथ जोड़े जा सकते हैं, वह भी कितना बड़ा आविष्कर्ता रहा होगा!

    इन्हीं दो उदाहरणों पर विचार कीजिए; पहले उदाहरण में एक चीज़ है किसी व्यक्ति विशेष की आग का आविष्कार कर सकने की शक्ति और दूसरी चीज़ है आग का आविष्कार। इसी प्रकार दूसरे सुई-धागे के उदाहरण में एक चीज़ है सुई-धागे का आविष्कार कर सकने की शक्ति और दूसरी चीज़ है सुई-धागे का आविष्कार।

    जिस योग्यता, प्रवृत्ति अथवा प्रेरणा के बल पर आग का व सुई-धागे का आविष्कार हुआ, वह है व्यक्ति विशेष की संस्कृति; और उस संस्कृति द्वारा जो आविष्कार हुआ, जो चीज़ उसने अपने तथा दूसरों के लिए आविष्कृत की, उसका नाम है सभ्यता।

    जिस व्यक्ति में पहली चीज़, जितनी अधिक व जैसी परिष्कृत मात्रा में होगी, वह व्यक्ति उतना ही अधिक व वैसा ही परिष्कृत आविष्कर्ता होगा।

    (i) लेखक ने सुई के आविष्कारक को बड़ा आविष्कर्ता क्यों माना है? (11/2)

    (ii) व्यक्ति विशेष की संस्कृति से क्या तात्पर्य है? (11/2)

    (iii) लेखक के अनुसार सभ्यता किसे कहते हैं? (11/2)

    (iv) लेखक ने यह क्यों कहा है कि अधिकांश लोग संस्कृति और सभ्यता का अर्थ नहीं समझते? (11/2)

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  • Question 14

    निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए – (3 + 3 + 3)

    (i) लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?

    (ii) 'एक कहानी यह भी' में लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?

    (iii) स्पष्ट कीजिए कि बिस्मिल्ला खाँ वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे।

    (iv) 'संस्कृति' निबंध के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है।

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  • Question 15

    (i) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर अपनी गाड़ी क्यों रोकते थे? (3)

    (ii) 'स्त्रियों को पढ़ाने से अनर्थ होते हैं' – कुतर्कवादियों की इस दलील का खंडन द्विवेदी जी ने कैसे किया है, अपने शब्दों में लिखिए। (2)

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  • Question 16

    'साना-साना हाथ जोड़ि' के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गए?

    अथवा

    आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खानपान सम्बन्धी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा हैं। इस प्रकार की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार हैं?

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  • Question 17

    निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए – (2 + 2 + 2)

    (i) 'कटाओ पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है।' इस कथन के पक्ष में अपनी राय व्यक्त कीजिए।

    (ii) प्रधान सम्पादक ने शर्मा जी की रिपोर्ट को प्रकाशित करना उचित क्यों नहीं समझा?

    (iii) 'माता का अँचल' पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ में इसकी क्या वजह हो सकती है?

    (iv) 'साना-साना हाथ जोड़ि...' रचना में लेखिका ने तीस्ता नदी की धारा के निकट क्या प्रार्थना की?

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